रांची। झारखंड में किशोरियों के स्वास्थ्य, बाल विवाह और असमय गर्भधारण को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के आंकड़ों के हवाले से सामने आया है कि राज्य में महिलाओं के स्वास्थ्य और गर्भावस्था से जुड़े जोखिम गर्भधारण से बहुत पहले ही शुरू हो जाते हैं।
इन आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में लगभग हर तीसरी महिरांची में राज्य स्तरीय परामर्श बैठक: किशोरी बालिकाओं के गर्भधारण और बाल विवाह पर चिंता, 'प्री-कंसेप्शन केयर' पर दिया गया जोर
रांची: झारखंड में किशोरियों के स्वास्थ्य, बाल विवाह और असमय गर्भधारण को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के आंकड़ों के हवाले से सामने आया है कि राज्य में महिलाओं के स्वास्थ्य और गर्भावस्था से जुड़े जोखिम गर्भधारण से बहुत पहले ही शुरू हो जाते हैं।
इन आंकड़ों के अनुसार झारखंड में लगभग हर तीसरी महिला (29.2%) कम वजन (अंडरवेट) की समस्या से जूझ रही है, जबकि 16.9% महिलाएं अधिक वजन और मेटाबॉलिक जोखिमों का सामना कर रही हैं। बाल विवाह की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है—20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की 28% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में ही हो गया था। इसके अलावा राज्य में हर नौ में से एक किशोरी (11.7%) 18 वर्ष से कम आयु में ही गर्भवती हो चुकी है या मां बन चुकी है।
इन चुनौतियों से निपटने और स्वास्थ्य व्यवस्था का ध्यान केवल गर्भावस्था तक सीमित न रखकर 'गर्भधारण से पहले की देखभाल' पर केंद्रित करने के उद्देश्य से बुधवार को रांची में एक राज्य स्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। यह आयोजन राज्य सरकार के सहयोग से संस्था सिनी (चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट) द्वारा किया गया।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे की नींव गर्भावस्था के दौरान नहीं, बल्कि उससे पहले ही रखी जाती है। किशोरावस्था से ही पोषण, एनीमिया नियंत्रण, मानसिक व प्रजनन स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली पर ध्यान देना प्राथमिकता होनी चाहिए।
मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा ने स्पष्ट किया कि केवल जागरूकता फैलाना पर्याप्त नहीं है। समय रहते स्वास्थ्य जांच (स्क्रीनिंग), सटीक उपचार, नियमित परामर्श और निरंतर फॉलो-अप ही जीवन बचाने के वास्तविक उपाय हैं।
इस राज्य स्तरीय मंथन में जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों और कानूनी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया तथा किशोरी स्वास्थ्य व बाल विवाह रोकथाम पर ठोस रणनीति बनाने का आह्वान किया।ला (29.2%) कम वजन (अंडरवेट) की समस्या से जूझ रही है, जबकि 16.9% महिलाएं अधिक वजन और मेटाबॉलिक जोखिमों का सामना कर रही हैं। बाल विवाह की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है—20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की 28% महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से कम उम्र में ही हो गया था। इसके अलावा राज्य में हर नौ में से एक किशोरी (11.7%) 18 वर्ष से कम आयु में ही गर्भवती हो चुकी है या मां बन चुकी है।
इन चुनौतियों से निपटने और स्वास्थ्य व्यवस्था का ध्यान केवल गर्भावस्था तक सीमित न रखकर 'गर्भधारण से पहले की देखभाल' पर केंद्रित करने के उद्देश्य से बुधवार को रांची में एक राज्य स्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। यह आयोजन राज्य सरकार के सहयोग से संस्था सिनी (चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट) द्वारा किया गया।
