रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने गुजरात में पंजीकृत कई गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को मिले अरबों रुपये के संदिग्ध चंदे पर तीखा हमला बोला है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीबीसी और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए जांच एजेंसियों की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए।
झामुमो नेता ने पूरे मामले को मनी लॉन्ड्रिंग और जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि देश में 2,800 से अधिक पंजीकृत दल हैं, जिनमें 6 राष्ट्रीय और 67 क्षेत्रीय दल हैं। गुजरात में ऐसी कई अप्रत्यक्ष 'शेल पार्टियां' सक्रिय हैं, जिनका कोई राजनीतिक वजूद नहीं है।
'लोकशाली सत्ता पार्टी' को वर्ष 2023-24 में 1,045 करोड़ का चंदा मिला, जिसमें से 950 करोड़ खर्च दिखाए गए। वहीं कई अन्य दलों के खातों में 138 करोड़ से 1,000 करोड़ तक जमा हैं, जबकि इनमें से कई दल चुनाव भी नहीं लड़ते।
संदिग्ध पाई गई 10 प्रमुख पार्टियों में से 6 का पता अहमदाबाद दर्ज है। जमीनी जांच में इनके दफ्तर दुकानों के बंद शटर और खाली पड़े फ्लैटों में मिले।
ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग और चुनाव आयोग की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए झामुमो ने पूछा कि बिना राजनीतिक गतिविधि के इतना चंदा देने वाले चेहरे कौन हैं? क्या इस पैसे का इस्तेमाल सरकारों को गिराने और विधायकों की खरीद-फरोख्त में हो रहा है?
झामुमो ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर जोर देते हुए कहा कि अधिकारियों को प्रक्रिया सरल बनानी चाहिए ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम न कटे और केवल अपात्र नाम ही हटाए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव करीब आते ही राजनीतिक लाभ के लिए बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे मुद्दों को जानबूझकर हवा दी जाती है। झामुमो ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।
मोदी सरकार की भूमिका संदिग्ध: कांग्रेस
रांची। पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से जुड़े कथित टैक्स चोरी के मामलों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से विदेशों में जमा काला धन वापस लाने और हर नागरिक के खाते में 15 लाख रुपये आने का सपना दिखाया था। न विदेशों से 15 लाख आए, न काला धन वापस आया। उन्होंने आशंका जतायी कि भाजपा शासन में देश के भीतर ही काले धन को सफेद करने का नया रास्ता तैयार कर रही है। राकेश सिन्हा ने कहा कि सैकड़ों राजनीतिक दलों के जरिए 10,000 करोड़ से अधिक की कथित टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। मोदी सरकार इसका जवाब दे अन्यथा उसकी भूमिका पर सवाल उठेंगे।
