नई दिल्ली/रांची। बिहार और झारखंड के बीच पिछले 25 वर्षों से चला आ रहा सोन नदी जल विवाद आखिरकार सोमवार को सुलझ गया। दोनों राज्यों के बीच नदी के जल बंटवारे को लेकर नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते के तहत सोन नदी के कुल 14.25 एमएएफ (मिलियन एकड़ फीट) पानी का बंटवारा किया गया है, जिसमें बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2 एमएएफ पानी मिलेगा। जल बंटवारे को लेकर वर्ष 2025 में आयोजित पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में सहमति बनी थी, जिसे अब अंतिम रूप दे दिया गया है।

झारखंड की ओर से लगातार सोन नदी के पानी में वाजिब हिस्सेदारी की मांग की जा रही थी। झारखंड सरकार का तर्क था कि सोन नदी का उद्गम स्थल और एक बड़ा कैचमेंट एरिया झारखंड के क्षेत्र में आता है।

एमओयू पर हस्ताक्षर होने के साथ ही

झारखंड के सूखाग्रस्त और कृषि क्षेत्रों में पानी मिलने से खेती और फसल उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।नदी बेसिन और आसपास के प्रभावित इलाकों में पीने के पानी की उपलब्धता बेहतर होगी।जल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होने से स्थानीय स्तर पर उद्योगों और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

उधर, बिहार में बहुप्रतीक्षित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। सोन नदी,जो गंगा की एक प्रमुख दक्षिणी सहायक नदी है पूर्वी भारत के कृषि क्षेत्र के लिए जीवन रेखा मानी जाती है। यह समझौता सोन नहर प्रणाली से जुड़ी सिंचाई योजनाओं को एक स्थिर आधार प्रदान करेगा। इस परियोजना के शुरू होने से बिहार के भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल जिलों के किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा। सोन नदी जल बंटवारे का यह सफल समझौता न केवल दो राज्यों के बीच संसाधन विभाजन का समाधान प्रस्तुत करता है, बल्कि अंतर-राज्यीय सहयोग, नदी-घाटी प्रबंधन और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है।