रांची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त जारी की। डीबीटी के माध्यम से देश के 9.34 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में कुल 18,690 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई। इस योजना के तहत झारखंड के लगभग 19 लाख किसानों के खातों में करीब 300 करोड़ रुपये पहुंचे हैं।
इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम का सीधा प्रसारण रांची स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय माध्यमिक कृषि संस्थान (आईसीएआर-एनआईएसए) के पलाश कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। इस दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने आईसीएआर-एनआईएसए के कार्यों की सराहना की और इसके और अधिक विस्तार का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किसानों के कल्याण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने झारखंड के 19 लाख किसानों को मिली 24वीं किस्त का जिक्र करते हुए किसानों से अपील की कि वे इस राशि का सदुपयोग करें। साथ ही, उन्होंने उन्नत बीजों के इस्तेमाल और खेत एवं किसान दोनों के स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाने पर विशेष जोर दिया।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार के संयुक्त सचिव फ्रैंकलिन के. खोबुंग ने बताया कि झारखंड में पीएम-किसान योजना के तहत लगभग 19 लाख किसान पंजीकृत हैं। उन्होंने राज्य अधिकारियों से आग्रह किया कि जो पात्र किसान अब तक इस योजना के लाभ से वंचित हैं, उन्हें जल्द से जल्द जोड़ा जाए।
उन्होंने केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (पीएम-आरकेवीवाई),कृषि उन्नति योजना,सिंचाई एवं सूक्ष्म सिंचाई दलहन और तिलहन मिशन पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) के तहत झारखंड में करीब 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र प्राकृतिक खेती के अंतर्गत आता है, जिससे 11,000 से अधिक किसान जुड़े हैं।
झारखंड सरकार के कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने 'खेत बचाओ अभियान' पर चर्चा करते हुए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत किया। उन्होंने मृदा की उर्वरता बनाए रखने, लैम्प्स के जरिए उन्नत बीजों के वितरण, तथा खेतों के डिजिटल क्रॉप सर्वे व जियोफेंसिंग कार्यों की जानकारी दी।
आईसीएआर-एनआईएसए के निदेशक डॉ. अभिजीत कर ने स्वागत भाषण में योजना को किसानों को सशक्त बनाने वाली पहल बताया। उन्होंने आग्रह किया कि यदि कोई किसान दस्तावेजों की औपचारिकता के कारण लाभ से वंचित है, तो वह आवश्यक प्रक्रियाएं जल्द पूरी कर लें। संस्थान किसानों की हरसंभव मदद के लिए सदैव तत्पर है। कार्यक्रम में कृषि, मृदा संरक्षण एवं बागवानी विभाग के अन्य अधिकारियों ने भी किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी।
