रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने पाकुड़ स्थित पैनम कोल माइंस में कथित अवैध खनन और करीब 999 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान के मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए अदालत ने पूरे मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को सौंपने का निर्देश दिया है।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने अधिवक्ता रामसुभग सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एसीबी को 5 नवंबर तक अपनी जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई नवंबर में तय की गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि पैनम कोल माइंस कंपनी ने लीज क्षेत्र और तय सीमा से अधिक कोयला निकाला, जिससे राज्य सरकार को लगभग 999 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने दुमका के तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त की 19 अक्टूबर 2015 की रिपोर्ट का जिक्र किया। अदालत ने टिप्पणी की कि रिपोर्ट के बाद पाकुड़ के तत्कालीन उपायुक्त सुनील कुमार को महज शो-कॉज नोटिस जारी किया गया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
याचिका में निष्पक्षता के लिए सीबीआई जांच की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने मामले की जांच एसीबी को सौंपी है।
यह मामला वर्ष 2015 से हाईकोर्ट में लंबित था। लंबे समय से प्रभावी कार्रवाई न होने पर सख्त टिप्पणी करते हुए अदालत ने अब एसीबी को स्वतंत्र जांच का जिम्मा सौंपा है।
