रांची। खान एवं खनिज विकास और विनियमन (एमएमडीआर) संशोधन विधेयक 2026 को लेकर झारखंड में सियासी पारा चढ़ गया है। इस विधेयक के विरोध में प्रदेश कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए पूरे राज्य में जोरदार प्रदर्शन किया। राजधानी रांची सहित सभी जिला मुख्यालयों पर आयोजित इस आंदोलन में पार्टी के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस बिल को झारखंड के आर्थिक हितों पर बड़ा कुठाराघात बताया।
रांची में जिला महानगर और ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बापू वाटिका से समाहरणालय भवन तक विरोध जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें विवादित एमएमडीआर विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। इसके अलावा ज्ञापन में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के नाम पर हुई कथित चंदा चोरी की निष्पक्ष जांच कराने के लिए हस्तक्षेप का भी आग्रह किया गया है।
खनिज रॉयल्टी पर हक की लड़ाई: दीपिका पांडेय सिंह
गोड्डा में आयोजित प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड के आदिवासी और मूलवासी पीढ़ियों से प्राकृतिक संपदा की रक्षा करते आए हैं। केंद्र सरकार उनके अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि केंद्र पर राज्य का लगभग ₹1.36 लाख करोड़ का खनिज रॉयल्टी बकाया है। नए बिल से सेस के रूप में मिलने वाले करीब ₹14,000 करोड़ के राजस्व पर भी सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने परिसीमन के बहाने वंचित वर्गों के अधिकार छीनने का आरोप भी लगाया।
झारखंड में लागू नहीं होने देंगे काला कानून: डॉ. इरफान अंसारी
जामताड़ा में मोर्चा संभालते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस विधेयक को 'काला कानून' करार दिया और स्पष्ट किया कि कांग्रेस इसे राज्य में किसी कीमत पर लागू नहीं होने देगी। राम मंदिर मुद्दे पर बात रखते हुए उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण से किसी को आपत्ति नहीं थी, लेकिन चंदे में हुई धांधली को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब भारतीय जनता पार्टी को देना ही पड़ेगा।
कांग्रेस नेतृत्व ने ऐलान किया है कि एमएमडीआर विधेयक और राज्य विरोधी नीतियों के खिलाफ यह जन-आंदोलन अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पंचायत और गांव-गांव के स्तर तक ले जाया जाएगा।
