​रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा के जरिए बहाल हुए 1932 अधिकारियों के भविष्य का फैसला आज झारखंड हाईकोर्ट में होना है। राज्य सरकार द्वारा 17 अगस्त को इन नियुक्तियों पर लगाई गई रोक के बाद यह मामला अदालत की दहलीज पर पहुंचा था।

​हाईकोर्ट ने 21 अगस्त को सुनवाई करते हुए सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी और दोनों पक्षों को 15 सितंबर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।

झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सीआईडी जांच के दौरान टीडीपीएल की संलिप्तता के तथ्य सामने आए थे। इसके बाद, व्यापक छात्र आंदोलनों के दबाव में राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात विवादित परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया था। कार्मिक विभाग की अधिसूचना के तहत​22 परीक्षाएं पूरी तरह रद्द कर दी गईं।​6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की गई।​17 परीक्षाएं जांच के दायरे में रखी गईं।​इसी प्रशासनिक कार्रवाई के तहत जेएसएससी-सीजीएल से हुई नियुक्तियां भी प्रभावित हुई थीं।

​रिफॉर्म मंच की सरकार को चेतावनी

दूसरी ओर, ' जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच' ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए मामले में 'सेग्रिगेशन' की कोशिश का आरोप लगाया है। मंच के प्रवक्ता रविंद्र पासवान ने 15 सितंबर की सुनवाई से पहले सरकार को आगाह करते हुए कहा कि सरकार किसी भी तरह के सेग्रिगेशन के फेर में न पड़े और परीक्षा रद्द करने के अपने मूल फैसले को अदालत के समक्ष मजबूती से रखे। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि सरकार यह भूलने की भूल न करे कि छात्रों का आंदोलन सिर्फ स्थगित हुआ है, समाप्त नहीं।