​रांची।झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते के कार्यकाल के दौरान आयोजित हुईं 36 परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और सुनियोजित धांधली के पुख्ता प्रमाण सामने आए हैं। सीआईडी (अपराध अनुसंधान शाखा) द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।

​जांच रिपोर्ट के अनुसार, एल. ख्यांगते के कार्यकाल में हुई सभी परीक्षाओं में जानबूझकर और एक व्यवस्थागत साजिश के तहत हेराफेरी की गई। इस अवधि में कुल 36 परीक्षाओं के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी 'टीडीपीएल' और 'बिनसिस' नामक दो संदिग्ध एजेंसियों को नियम-विरुद्ध तरीके से सौंप दी गई थी। प्रभावित प्रमुख परीक्षाओं में 14वीं जेपीएससी संयुक्त असैनिक परीक्षा, 11वीं-13वीं जेपीएससी, वन क्षेत्र पदाधिकारी, सहायक वन संरक्षक, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, झारखंड पात्रता परीक्षा और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाएं शामिल हैं।

​सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते और तत्कालीन प्रभारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने नियमित परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा द्वारा दी गई लिखित प्रतिकूल टिप्पणियों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। इसके बावजूद, दोनों दागी एजेंसियों को परीक्षाओं के आयोजन का जिम्मा दे दिया गया।

​जांच में यह भी पाया गया कि एल. ख्यांगते और श्वेता गुप्ता ने इन एजेंसियों के साथ मिलीभगत कर उत्तर पुस्तिकाओं की कोडिंग-डिकोडिंग जैसे बेहद संवेदनशील और गोपनीय कार्य आयोग के स्तर पर कराने के बजाय सीधे एजेंसियों को सौंप दिए। इतना ही नहीं, रिजल्ट की स्वतंत्र स्क्रूटनी (जांच) की व्यवस्था को निष्प्रभावी कर दिया गया और परीक्षाओं को लेकर मिलने वाली शिकायतों पर भी जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

​चार्जशीट में बताया गया है कि इस सांठगांठ के तहत एजेंसी के निदेशकों, कर्मियों, आयोग के अधिकारियों, दलालों और सॉल्वर गैंग ने मिलकर एक आपराधिक षडयंत्र रचा। प्रारंभिक परीक्षा (पीटी), मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू)—तीनों ही चरणों में एक जैसी कार्यशैली अपनाई गई। आरोप है कि अवैध रूप से भारी रकम लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को परीक्षा में सफल बनाया गया, जिससे कई योग्य और मेधावी अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए।

​सीआईडी ने अपनी चार्जशीट में स्पष्ट किया है कि एल. ख्यांगते ने एक उच्च संवैधानिक पद पर रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया और जानबूझकर इस आपराधिक कृत्य में शामिल रहे। अदालत को यह भी जानकारी दी गई है कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अभियोजन स्वीकृति आदेश प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।