तलगड़िया (बोकारो)। चास प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक धनडाबर गांव में मां दुर्गा की पूजा पिछले करीब 250 वर्षों से पूरी पारंपरिक और विधि-विधान के साथ की जा रही है। यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए अगाध आस्था और अटूट विश्वास का प्रमुख केंद्र है, जिससे आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस दुर्गा मंदिर की स्थापना लगभग 250 वर्ष पूर्व मनसा राम चौबे द्वारा की गई थी। तभी से चली आ रही पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार ही यहां पूजा-अर्चना संपन्न होती है। वर्तमान में धनडाबर पूजा समिति इस ऐतिहासिक आयोजन को संभाल रही है, जिसमें पूर्णेन्दु चौबे, दिलीप चौबे, नारायण चौबे, अशोक चौबे, बीडी चौबे, उज्ज्वल चौबे और मनोज चौबे सहित दर्जनों सक्रिय सदस्य अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस मंदिर में पारंपरिक बलि प्रथा की परंपरा भी आज भी प्रचलित है।

धनडाबर की दुर्गापूजा में महाष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन सुबह तालाब में स्नान करने के बाद सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दंडवत करते हुए मां दुर्गा के मंदिर तक पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का यह कठिन और समर्पित अनुष्ठान मां के प्रति उनकी गहरी निष्ठा को दर्शाता है। भक्तों का ऐसा अटूट विश्वास है कि सच्चे मन से यहां जो भी मुराद मांगी जाती है, मां दुर्गा उसे अवश्य पूरा करती हैं।

धनडाबर गांव की यह सदियों पुरानी दुर्गापूजा आज भी क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक विरासत, आपसी सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है।