​नई दिल्ली/जमशेदपुर। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार की जाने वाली संताली भाषा की पाठ्य पुस्तकों और शैक्षणिक सामग्रियों को देवनागरी के बजाय अनिवार्य रूप से इसकी मूल 'ओलचिकी लिपि' में ही प्रकाशित करने का आग्रह किया।

​रघुवर दास ने मुलाकात के दौरान शिक्षा मंत्री से कहा कि संताली भाषा की अपनी वैज्ञानिक और सर्वमान्य 'ओलचिकी लिपि' है। इसे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था।

​वर्ष 2025 में ओलचिकी लिपि का शताब्दी वर्ष मनाया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओलचिकी लिपि में अनुवादित भारत के संविधान का लोकार्पण किया था। इसके अलावा, 'हूल दिवस' पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ओलचिकी में देश को संदेश जारी किया था।

उन्होंने कहा कि साहित्य अकादमी पुरस्कार संताली की ओलचिकी लिपि में दिया जाता है। केंद्र सरकार की वेबसाइटों से लेकर झारखंड, बंगाल, ओडिशा, असम, नेपाल और बांग्लादेश में इस लिपि का व्यापक प्रयोग होता है। पूर्ववर्ती सरकार में रेल स्टेशनों और कार्यालयों के नामपट्ट भी इसी लिपि में लिखे गए थे।

रघुवर दास ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय की सभी संबंधित संस्थाओं को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि संताली भाषा की सभी पुस्तकें, संदर्भ सामग्री और डिजिटल संसाधन केवल और केवल 'ओलचिकी लिपि' में ही प्रकाशित हों। पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, इस विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के साथ वार्ता बेहद सकारात्मक रही।