बोकारो। भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) के गैर-कार्यपालक कर्मचारियों के बोनस निर्धारण को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। आगामी 01 अक्टूबर को प्रस्तावित बोनस सब-कमेटी की बैठक में सेल की विभिन्न इकाइयों से लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए वास्तविक यूनियन प्रतिनिधियों को निमंत्रण न भेजे जाने पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

श्रमिक नेताओं का आरोप है कि एक तरफ देशभर में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जन-प्रतिनिधित्व को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सेल प्रबंधन कर्मचारियों से जुड़े इतने महत्वपूर्ण फोरम पर गैर-निर्वाचित और केंद्रीय नेताओं के साथ बातचीत कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर चुने गए प्रतिनिधि इस पूरी प्रक्रिया से बाहर हैं।

आरोप है कि सेल प्रबंधन ने केंद्रीय श्रम कानूनों को दरकिनार करते हुए पांच प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों—बीएमएस, इंटक, एचएमएस, एटक और सीटू—के वरिष्ठ पदाधिकारियों और उनके सह-प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया है।

दूसरी ओर, राउरकेला इस्पात संयंत्र से प्रशांत बेहरा (इंटक), इस्को बर्नपुर से संजीत बनर्जी (बीएमएस), वीआईएसएल भद्रावती से अमृत (नन-एनजेसीएस) और सेलम इस्पात संयंत्र से पी. शिवकुमार (एलपीएफ) जैसे निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस बैठक से दूर रखा गया है।

स्थिति यह है कि बोकारो, भिलाई, एएसपी दुर्गापुर, डीएसपी दुर्गापुर और सीएफपी चंद्रपुर जैसी बड़ी इकाइयों में पिछले कई दशकों से यूनियन चुनाव ही नहीं कराए गए हैं। इसके अलावा माइंस, एसआरयू और सीएमओ जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों की मान्यता प्राप्त यूनियनों को भी एनजेसीएस में कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है।

यूनियन प्रतिनिधियों और कर्मचारियों द्वारा प्रबंधन के एएसपीएलआईएस बोनस फॉर्मूले का कड़ा विरोध किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यह फॉर्मूला पूरी तरह प्रबंधन द्वारा तैयार किया गया है और इसमें यूनियनों का कोई सुझाव शामिल नहीं है।

एनजेसीएस नियमों के तहत कोई भी फैसला सर्वसहमति से होना चाहिए। हालांकि एटक और सीटू के बिना हस्ताक्षर के केवल बीएमएस, इंटक और एचएमएस के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर पर इसे बहुमत के आधार पर लागू कर दिया गया।

एनजेसीएस बैठक के मिनट्स में निदेशक (कार्मिक) ने स्वीकार किया था कि फॉर्मूले को किसी यूनियन ने पूरी तरह स्वीकार नहीं किया, जबकि मुख्य श्रमायुक्त को भेजे जवाब में तत्कालीन ईडी (एचआर) बीएस पोपली ने इसे बहुमत से लागू होना बताया। बोनस का आधार वास्तविक उत्पादन और लाभ के बजाय पिछले तीन वर्षों के औसत बोनस से जोड़ दिया गया है। लेबर प्रॉडक्टिविटी और एपीपी टारगेट के बावजूद बोनस वृद्धि पर बिना किसी ठोस आधार के अधिकतम 4% की वार्षिक सीमा (कैप) लगा दी गई है, जिससे कर्मचारियों का भविष्य का नुकसान तय है।

बोकारो अनधिशाषी कर्मचारी संघ (बीएकेएस) के कार्यकारी अध्यक्ष रणधीर कुमार ने प्रबंधन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री 2047 तक 'विकसित भारत' का विजन दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सेल प्रबंधन की नीतियां कर्मचारियों का शोषण कर रही हैं। 2017 वेज रिवीजन में देरी और बोनस फॉर्मूले की धांधली से सेल कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।