रांची/​धनबाद। जहाजटांड़ बस्ती में सड़क काटने और खनन सुरक्षा नियमों की कथित अनदेखी का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। जहाजटांड़ निवासी खेमलाल महतो ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत जनहित याचिका दायर कर बीसीसीएल और उसकी आउटसोर्सिंग एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका में कहा गया है कि बस्ती को जोड़ने वाली एकमात्र सार्वजनिक सड़क को काट दिए जाने से लगभग 10 हजार ग्रामीणों का संपर्क पूरी तरह कट गया है।

याचिका में कहा गया है कि भौरा से जहाजटांड़ तक 3.5 किलोमीटर लंबी यह सड़क ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा 2015 में राज्य सरकार की योजना के तहत 1.65 करोड़ रुपये की लागत से बनवाई गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि सार्वजनिक धन से बनी सड़क को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के नष्ट करना आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

मामले में बीसीसीएल की वादाखिलाफी को भी उजागर किया गया है। वर्ष 2019, 2020, 2021 और 2023 के दौरान विधायक, अनुमंडल पदाधिकारी और बीसीसीएल के सीएमडी स्तर पर हुई बैठकों में वैकल्पिक पक्की सड़क बनाने और मूल सड़क बहाल करने का लिखित आश्वासन दिया गया था, लेकिन धरातल पर कोई स्थायी कदम नहीं उठाया गया।

याचिका के अनुसार 21 अगस्त की रात करीब 11:30 बजे बीसीसीएल और आउटसोर्सिंग एजेंसी ने 100 से अधिक लोगों को तैनात कर बिना किसी सरकारी आदेश व सूचना के सड़क काट दी। इस घटना के बाद ग्रामीणों का भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, जिससे कई दिनों तक कोयला ढुलाई ठप रही और पुलिस व सीआईएसएफ को तैनात करना पड़ा। धनबाद के मेयर ने भी स्थिति का जायजा लेकर सड़क बहाली तक काम रोकने की बात कही थी।

याचिका में खान सुरक्षा महानिदेशालय की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि वैकल्पिक सड़क के ठीक बगल में 30 मीटर से अधिक ऊंचा ओवरबर्डन डंप लगभग 90 डिग्री के खतरनाक ढलान पर खड़ा किया गया है। यह कोल माइंस रेगुलेशन 2017 के नियम 108 का सीधा उल्लंघन है, जिसके तहत अधिकतम ढलान 37.5 डिग्री और बेंचिंग होना अनिवार्य है। इसके अलावा नियम 101 और 106 के मानकों की अनदेखी की बात भी कही गई है।

​याचिका में ​काटी गई मूल सड़क को तत्काल बहाल करने,​ग्रामीणों के लिए सुरक्षित और वैकल्पिक पक्की सड़क का निर्माण, डीजीएमएस द्वारा स्थल का तत्काल निरीक्षण कराकर सुरक्षा मानक तय करने और ​पूरी घटना की समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई है।