सुधाकर

​​रांची। झारखंड सरकार के वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजटीय आवंटन, व्यय और निधियों के प्रबंधन को लेकर महालेखाकार (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बजटीय निधियों का अनुचित पुनर्विनियोग और समय पर राशि का समर्पण (Surrender) न होना एक बड़ी समस्या बना हुआ है।

​सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार ​वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान 28 अनुदानों के तहत 867.14 करोड़ के पुनर्विनियोग आदेश जारी किए गए थे। ऑडिट में पाया गया कि पांच योजनाओं में यह प्रावधान का संवर्धन अनावश्यक साबित हुआ, क्योंकि वास्तविक व्यय या तो मूल/अनुपूरक बजट के स्तर तक भी नहीं पहुंच सका या फिर पुनर्विनियोजित राशि का आंशिक उपयोग ही हो सका।

वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य सरकार के तीन प्रमुख विभागों के पूंजीगत प्रभागों में भारी लापरवाही देखने को मिली है। इन विभागों के लिए आवंटित कुल 24.32 करोड़ के बजट प्रावधान में से एक भी रुपया खर्च नहीं किया जा सका, जिससे यह पूरी राशि अप्रयुक्त रह गई।

​प्राप्त विवरण के अनुसार गैर-खर्च राशि का सबसे बड़ा हिस्सा सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग (पूंजीगत - दत्तमत) का है। अनुदान संख्या 45 के तहत इस विभाग को आवंटित 19.13 करोड़ की पूरी राशि बिना किसी उपयोग के धरी रह गई।

​इसी प्रकार, अनुदान संख्या 54 के अंतर्गत कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के डेयरी प्रभाग (पूंजीगत - दत्तमत) में भी विकास कार्यों के लिए स्वीकृत 5.00 करोड़ की पूरी राशि अप्रयुक्त रही और एक पैसा भी खर्च नहीं हुआ।

​इसके अलावा,अनुदान संख्या 35 के तहत योजना एवं विकास विभाग (पूंजीगत - दत्तमत) के लिए निर्धारित 0.19 करोड़ (19 लाख रुपये) का प्रावधान भी शून्य व्यय के साथ समाप्त हो गया।

​इन तीनों प्रमुख पूंजीगत प्रभागों में कुल मिलाकर 24.32 करोड़ का विनियोग पूरी तरह बेकार साबित हुआ, जिससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और बजटीय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार 52 अनुदानों और 4 विनियोगों के तहत कुल 31,101.04 करोड़ की बचत दर्ज की गई।कुल बचत में से 11,560.49 करोड़ (लगभग 36.17%) की राशि को वित्तीय वर्ष के अंत तक अभ्यर्पित (Surrender) ही नहीं किया गया।

​वर्ष के दौरान कुल 19,856.16 करोड़ (63.83%) का जो अभ्यर्पण किया गया, वह पूरा का पूरा मार्च 2025 (वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने) में हड़बड़ी में किया गया।

​वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान 23 अनुदानों के तहत 28 मामलों में लगातार हर साल 100 करोड़ से अधिक की सतत बचत (Unspent Funds) देखी गई।

​सरकार का पक्ष

​ऑडिट रिपोर्ट में उठाए गए इन गंभीर सवालों पर राज्य सरकार ने (25 नवंबर 2025 को) अपनी सफाई में कहा है कि बजट आकलन, निगरानी और वित्तीय नियंत्रण तंत्र को भविष्य में और मजबूत किया जाएगा।