जमशेदपुर। दुर्गा पूजा के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा और नियमों के अनुपालन को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसी क्रम में सुंदरनगर थाना क्षेत्र में स्थायी रूप से संचालित करीब आधा दर्जन पटाखा दुकानों की औचक जांच की गई। इस दौरान दुकानों में लाइसेंस और विस्फोटक सामग्री के भंडारण से जुड़े नियमों की बारीकी से पड़ताल की गई, जिसमें कई दुकानें बिना वैध लाइसेंस के संचालित पाई गईं।

मामले को गंभीरता से लेते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जिन दुकानदारों के पास वैध लाइसेंस नहीं है, वे किसी भी सूरत में पटाखा दुकानों का संचालन न करें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बिना अनुमति पटाखों का भंडारण और बिक्री करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और जरूरत पड़ने पर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जा सकता है।

शहर में पटाखा कारोबार को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सूत्रों का दावा है कि जमशेदपुर की करीब 95 प्रतिशत पटाखा दुकानें बिना वैध लाइसेंस के चल रही हैं। यदि यह दावा सही है, तो यह प्रशासनिक निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर कुछ इलाकों में थानों की कथित मिलीभगत से अवैध कारोबार के आरोप भी सामने आ रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों ने दलील दी कि मार्च तक उनके पास लाइसेंस था, लेकिन उसके बाद उसका नवीनीकरण नहीं हो पाया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद भी पटाखों का भंडारण और बिक्री जारी रखना पूरी तरह से अवैध है और यह कानूनी कार्रवाई के दायरे में आता है।

पटाखे बेहद संवेदनशील और विस्फोटक सामग्री हैं, इसलिए इनके मामले में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।