रांची। डोरंडा स्थित जैप-1 (झारखंड आर्म्ड पुलिस) ग्राउंड में गोरखा जवानों की ऐतिहासिक और अनूठी दुर्गा पूजा कलश स्थापना के साथ आरंभ हो गई है। 1880 में बटालियन के गठन के समय से चली आ रही है।इस 146 साल पुरानी परंपरा के तहत कलश स्थापना के पहले दिन जवानों ने बंदूकों से फायरिंग कर मां को सलामी दी। इसके अलावा, महासप्तमी और महानवमी के दिन भी फायरिंग कर विशेष सलामी दी जाएगी।
नवरात्रि के दौरान देवी की प्रतिमा के साथ-साथ आधुनिक हथियारों (इंसास, एके-47, एसएलआर, एलएमजी, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चर) की भी पूजा की जाएगी। महानवमी के दिन ये सभी हथियार मां दुर्गा के चरणों में रखे जाएंगे।
परंपरा के अनुसार महानवमी के दिन विशेष अनुष्ठान होगा जिसमें मां के चरणों में 101 बकरों की बलि अर्पित की जाएगी और हर एक बलि के बाद हर्ष फायर किया जाएगा।कलश स्थापना के अवसर पर जवानों द्वारा शानदार बैंड डिस्प्ले का प्रदर्शन किया गया।
गोरखा जवानों का अटूट विश्वास है कि मां दुर्गा की इस आराधना से रणक्षेत्र में उनके हथियार कभी धोखा नहीं देंगे और सटीक निशाना साधेंगे।
