रांची। राजधानी के मोरहाबादी मैदान में रविवार को आयोजित ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ में परिसीमन और खान एवं खनिज संशोधन विधेयक (एमएमडीआर एक्ट 2026) के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया गया। रैली में राज्यभर से जुटे हजारों लोगों ने अपने संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए 'नया उलगुलान' छेड़ने का संकल्प लिया।
महाजुटान को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू ने राहुल गांधी के संदेश का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासियों की उपेक्षा कर परिसीमन लागू करना संभव नहीं होगा। उन्होंने चेताया कि यह प्रक्रिया झारखंड में आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सीधे प्रभावित कर सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि आदिवासियों की चुप्पी का दौर समाप्त हो चुका है। उन्होंने मांग की कि राज्य के सभी 13 अनुसूचित जिलों की लोकसभा, विधानसभा और पंचायत सीटों को शत-प्रतिशत आदिवासियों के लिए आरक्षित किया जाए।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि 'सरना बनाम ईसाई' का विवाद खड़ा कर बाहरी ताकतें समाज को बांटना चाहती हैं, जबकि हमारी पहली पहचान आदिवासी और झारखंडी है। उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड के खनिजों पर एकाधिकार जमाकर स्थानीय लोगों को मजदूर बना दिया गया है। लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक आंकड़ों को चमकाने के लिए आदिवासियों का जबरन बंध्याकरण कराया गया। उन्होंने केंद्र के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें आदिवासियों की आबादी घटने की बात कही जा रही है।
इस रैली के मुख्य आयोजक पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने एमएमडीआर एक्ट को झारखंड के अधिकारों पर हमला बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट और अन्य सक्षम मंचों पर मजबूती से उठाएंगे।
इस महारैली में खूंटी सांसद कालीचरण मुंडा, प्रदीप यादव, राजेश कच्छप, भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोंगाड़ी, झामुमो विधायक विकास कुमार मुंडा और सुबोधकांत सहाय समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
मोराबादी में उमड़ा आदिवासियों का जनसैलाब

राजधानी का ऐतिहासिक मोराबादी मैदान आज आदिवासी समाज की अभूतपूर्व एकजुटता का गवाह बना। अवसर था 'आदिवासी एकता महाजुटान रैली' का, जहां पूरे राज्य से पहुंचे लोगों के जनसैलाब ने मैदान को पूरी तरह से पाट दिया। आयोजकों के अनुसार, इस विशाल रैली में 1 लाख से भी अधिक लोग शामिल हुए। मैदान के पूरी तरह भर जाने के बाद भी चारों दिशाओं से लोगों का पहुंचना लगातार जारी रहा। पारंपरिक परिधानों में पहुंचे पुरुषों और महिलाओं के उत्साह से पूरा शहर रंगा नजर आया। शहर की लगभग सभी प्रमुख सड़कों पर मांदर की थाप और एकता के नारों के साथ मोरहाबादी की ओर बढ़ते लोगों का हुजूम ही दिखाई दे रहा था।
रैली में शामिल होने के लिए दूर-दराज के जिलों से लोगों के आने का सिलसिला तड़के ही शुरू हो गया था।इटकी, बेड़ो, गुमला और सिमडेगा की ओर से आने वाले ग्रामीण बड़ी-बड़ी रैलियों के रूप में रातू रोड होते हुए मैदान की ओर बढ़े।
खूंटी, तोरपा और पश्चिमी सिंहभूम से आए लोग बसों व निजी वाहनों से हरमू मैदान पहुंचे और वहां से पैदल ही मोरहाबादी के लिए रवाना हुए। कांके रोड, पुरुलिया रोड और बरियातू रोड पर भी दिनभर पैदल और वाहनों से आने वाले लोगों का भारी जमावड़ा बना रहा। शहर के हर कोने से मोरहाबादी मैदान की ओर बढ़ती इस भीड़ ने रांची में आदिवासी एकता और शक्ति का एक ऐतिहासिक दृश्य प्रस्तुत किया।
बिरसाइयत समाज ने दर्ज कराई मजबूती

आदिवासी एकता महाजुटान में परिसीमन के अहम मुद्दे पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पश्चिमी सिंहभूम से भगवान बिरसा मुंडा के अनुयायी (बिरसाइयत समाज) बड़ी संख्या में पहुंचे।देवगांव, बंदगांव, बड़की और बिरबा जैसे सुदूर जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों से आए इन लोगों ने एकजुटता का संदेश दिया। भगवान बिरसा मुंडा के बताए मार्ग पर चलने वाले बिरसाइयत परिवार अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, अलग पहनावे और अनूठी धार्मिक-सामाजिक परंपराओं के साथ इस महाजुटान में विशेष आकर्षण का केंद्र रहे।
