रांची। शहर के कुटे मैदान में रविवार को 'रिजर्वेशन रिफॉर्म आंदोलन, झारखंड' के बैनर तले एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान केंद्र सरकार से आरक्षण व्यवस्था को व्यावहारिक बनाने, एसटी एससी एक्ट में संशोधन करने और यूजीसी के नए प्रावधानों को वापस लेने की मांग की गई। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन किसी वर्ग या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि नीति-निर्माताओं तक अपनी बात पहुंचाने का एक संवैधानिक और शांतिपूर्ण प्रयास है।
आंदोलन से जुड़े सुमित दुबे ने कहा कि आरक्षण पूरी तरह समाप्त न भी हो, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इसका लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे। उन्होंने एसटी एससी एक्ट के दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि यदि जांच में मामला झूठा पाया जाए, तो शिकायतकर्ता के खिलाफ भी सजा और जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने यूजीसी के नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों में उपजे भय और भ्रम को दूर करने का आग्रह किया।
वहीं, जयंत शाहदेव ने प्रतिभा की उपेक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि यूजीसी के वर्तमान प्रावधानों के कारण कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र डर के साये में जीने को मजबूर हैं। झूठे आरोपों और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के डर से होनहार प्रतिभाओं का विकास प्रभावित होगा।
आयोजकों के अनुसार, कुटे मैदान के समीप यह जुटान अगले एक सप्ताह तक लगातार जारी रहेगा, जहां लोग एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाएंगे। इस अवसर पर करण शाहदेव और अंकित दुबे समेत कई अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे।
