​रांची: झारखंड में बाल लिंगानुपात में सुधार लाने और कन्या भ्रूण हत्या पर पूर्ण विराम लगाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने 'मुखबिर/डिकॉय योजना' की शुरुआत की है। पीसी-पीएनडीटी अधिनियम को सख्ती से लागू करने के लिए लोक स्वास्थ्य संस्थान, रांची में आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान यह जानकारी दी गई।

​योजना के तहत अवैध रूप से लिंग परीक्षण करने वाले संस्थानों, डॉक्टरों और बिचौलियों को पकड़वाने पर राज्य सरकार द्वारा कुल 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस राशि का बंटवारा तीन स्तरों पर किया जाएगा।

​मुख्य मुखबिर (गुप्त सूचना देने वाला) को 40,000 रुपये,​डिकॉय महिला (सहयोग करने वाली गर्भवती महिला) को 40,000 रुपये और ​सहयोगी (प्रक्रिया में मदद करने वाला साथी) को 20,000 रुपये दी जाएगी।

​कार्यशाला को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि यद्यपि झारखंड का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर है, फिर भी कुछ क्षेत्रों से अवैध लिंग जांच की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को छद्म (डिकॉय) रूप में छापेमारी करने और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखने का स्पष्ट निर्देश दिया।

​राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य अवैध क्लीनिकों और गिरोहों का भंडाफोड़ कर दोषियों को कानूनी दायरे में लाना है। इस राज्यस्तरीय कार्यशाला में विभिन्न जिलों के सिविल सर्जन, कार्यपालक दंडाधिकारी, महिला पुलिस अधिकारी और जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई के अधिकारी उपस्थित रहे।