जमशेदपुर। फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के कोल्हान प्रमंडल के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष एवं सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SCCI) के निवर्तमान अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया है कि वे अपने पैतृक गांव नेमरा को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य एवं शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करने की ऐतिहासिक पहल करें। उन्होंने सुझाव दिया कि गांव में उनके दिवंगत पिता, झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता स्वर्गीय शिबू सोरेन ‘गुरुजी’ के नाम पर एक विश्वस्तरीय अस्पताल तथा दिवंगत माता स्वर्गीय रूपी सोरेन के नाम पर एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय की स्थापना की जाए।

मूनका ने कहा कि माता-पिता की स्मृति को चिरस्थायी बनाने का सबसे सार्थक माध्यम ऐसा संस्थान स्थापित करना है, जो पीढ़ियों तक मानवता की सेवा करे। यदि नेमरा में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित अस्पताल और उच्चस्तरीय शिक्षा एवं अनुसंधान से युक्त विश्वविद्यालय स्थापित होते हैं, तो यह स्वर्गीय गुरुजी और स्वर्गीय रूपी सोरेन के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इन संस्थानों के माध्यम से उनके नाम और योगदान को आने वाली पीढ़ियां सदैव याद रखेंगी।

आर्थिक विकास और झारखंड की राष्ट्रीय पहचान को मिलेगा बढ़ावा

उन्होंने कहा कि इतने बड़े संस्थानों की स्थापना से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार अवसर पैदा करने की संभावना होगी। निर्माण कार्य, परिवहन, आवास, होटल, स्थानीय व्यापार, कृषि उत्पादों की मांग और अन्य सहायक सेवाओं को बढ़ावा मिल सकता है। इससे नेमरा सहित आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों की आय के नए स्रोत विकसित हो सकते हैं। ऐसे संस्थान झारखंड को चिकित्सा, उच्च शिक्षा और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे राज्य में निवेश आकर्षित करने, प्रतिभाशाली युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने तथा राज्य से बाहर जाने वाले विद्यार्थियों और मरीजों की संख्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।

सामाजिक समरसता और राज्य के प्रति नई पीढ़ी का जुड़ाव

मूनका ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य ऐसी बुनियादी आवश्यकताएं हैं, जिनका लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। यदि इन संस्थानों में आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद लोगों के लिए उचित सुविधाएं, छात्रवृत्तियां और रियायती उपचार की व्यवस्था की जाए, तो यह सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में उल्लेखनीय कदम होगा।

उन्होंने कहा कि इस पहल का राजनीतिक महत्व भी किसी व्यक्ति या दल तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह झारखंड के नेतृत्व की दूरदर्शिता, जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता और राज्य के भविष्य के निर्माण का प्रतीक बन सकती है। जनहित को केंद्र में रखकर लागू की गई ऐसी परियोजना राज्य के विकास की एक स्थायी विरासत तैयार कर सकती है।