रामगढ़। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता, हजारीबाग (अविभाजित) जिला के पूर्व सचिव, छोटकी पोना पंचायत के पूर्व मुखिया, रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी एवं किसानों-मजदूरों के लोकप्रिय नेता दिवंगत कॉमरेड मंगल ओहदार तथा पूर्व मुखिया टिकेन्द्र महतो के निधन पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा गुरुवार को ओहदार भवन, कांके बार में एक भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता ने की। प्रारंभ में दिवंगत नेताओं के तैल चित्र पर पुष्प-माला अर्पित कर दो मिनट का मौन रखकर विनम्र श्रद्धांजलि दी गई। लाल झंडे में लिपटे मंच पर विनम्र श्रद्धांजलि-इंकलाब जिंदाबाद, खेत बचाओ गांव बचाओ के नारों के बीच सभा शुरू हुई।
मुख्य वक्ता प्रदेश सचिव कॉमरेड महेन्द्र पाठक ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा, कॉमरेड मंगल ओहदार सच्चे अर्थों में कम्युनिस्ट थे। उन्होंने कभी पद और प्रतिष्ठा की लालसा नहीं की। पूरी ईमानदारी, सादगी और निष्ठा से जीवन भर लाल झंडा को बुलंद रखा।
उनका राजनीतिक जीवन 1970-80 के दशक में इस क्षेत्र में फैले महाजनी जुल्म और सामंती शोषण के खिलाफ संघर्ष से शुरू हुआ था। उन्होंने गरीब किसानों, बटाईदारों और खेत मजदूरों को संगठित कर सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया और सैकड़ों परिवारों को कर्ज के जाल से मुक्त कराया।
मुखिया के रूप में छोटकी पोना पंचायत में उन्होंने पारदर्शी और गरीब-हितैषी काम किया। पंचायत में उन्होंने जमीन के पट्टे, वन अधिकार, राशन-पेंशन और मनरेगा को लेकर जो मिसाल कायम की, वह आज भी याद की जाती है।
रामगढ़ विधानसभा के प्रत्याशी के रूप में उन्होंने विस्थापन, खदान मजदूरों के अधिकार, रैयतों के मुआवजे और स्थानीय नियोजन के सवालों को जोरदार तरीके से उठाया। सीसीएल , टाटा और अन्य कंपनियों द्वारा जमीन अधिग्रहण के खिलाफ उन्होंने कई सफल आंदोलनों का नेतृत्व किया।
उनके निधन से केवल पार्टी को ही नहीं, बल्कि पूरे रामगढ़, हजारीबाग और बोकारो क्षेत्र के किसान आंदोलन को अपूरणीय क्षति हुई है।
डॉ. मिथिलेश डांगी (राष्ट्रीय संयोजक, आजादी बचाओ आंदोलन) और डॉ. बी.एन. ओहदार ने कहा, मंगल दा सच्चे किसान नेता थे। वे कहते थे - खेत बचेगा तो गांव बचेगा, गांव बचेगा तो देश बचेगा। उन्होंने किसानों को उनके जल, जंगल, जमीन के अधिकारों के प्रति जागरूक किया। कई बार जेल गए, लाठियां खाईं, लेकिन झुके नहीं।
बोकारो जिला सचिव गणेश महतो, अधिवक्ता शंभू कुमार, कयूम मलिक, नेमन यादव आदि ने भी कहा कि मंगल ओहदार का जीवन हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए पाठशाला है।
अंत में सभा ने संकल्प लिया कि कॉमरेड मंगल ओहदार और टिकेन्द्र महतो के अधूरे सपनों-किसानों को फसल का सही दाम, नौजवानों को रोजगार, विस्थापितों को न्याय और पंचायतों में सच्चा स्वराज - को पूरा करने के लिए संघर्ष जारी रखा जाएगा।
श्रद्धांजलि सभा में उपरोक्त के अलावा चितरंजन महतो, सुरजीत कुमार उर्फ मिंटू, सिकंदर ओहदार, अमित महतो, भोला महतो, पवन कुमार सिंह, विरेन्द्र महतो, रामपाल महतो, मजदूर नेता कर्मा मांझी, राजेंद्र प्रसाद अमन महतो, जगदीश करमाली, शंभू कुमार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता, किसान और ग्रामीण मौजूद थे।
