बोकारो। बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में रोजगार की मांग को लेकर विस्थापितों का आंदोलन सातवें दिन शुक्रवार को और अधिक उग्र हो गया। विस्थापित अप्रेंटिस संघ का आमरण अनशन टू-टैंक गार्डन के पास लगातार जारी है।

शुक्रवार को आंदोलनकारियों ने प्लांट के कई प्रमुख गेटों पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए आवागमन बाधित करने की कोशिश की, जिससे संयंत्र के दैनिक कामकाज पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। विस्थापित नेता रघुनाथ महतो ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकालता, तो शनिवार को मेन गेट समेत प्लांट के सभी प्रवेश द्वारों को पूर्णत: बंद कर दिया जाएगा।

उनकी प्रमुख मांगों में 1500 विस्थापित अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं की सीधी बहाली,चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में पुरानी आरक्षण व्यवस्था की बहाली और विस्थापितों के लिए एक स्पष्ट व स्थाई नियोजन नीति का निर्माण है।

आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जिन परिवारों ने प्लांट की स्थापना के लिए अपनी ज़मीनें दी हैं, उनके युवाओं को रोज़गार का पहला हक मिलना चाहिए। प्रशिक्षण पूरा होने के बावजूद नौकरी न मिलने से युवा आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने साफ किया है कि वे ठेका मजदूरी नहीं, बल्कि नियमित नौकरी चाहते हैं।

मामले पर चिंता जताते हुए बोकारो की विधायक श्वेता सिंह ने कहा कि आंदोलनकारियों को पिछले डेढ़ साल से सिर्फ खोखले आश्वासन दिए जा रहे हैं। कमिटमेंट देकर पूरा न करना बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन का पुराना चरित्र रहा है।

विभिन्न संगठनों के एक मंच पर आने से आंदोलन का दायरा काफी बढ़ गया है। अब सभी की निगाहें बीएसएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की अगली पहल पर टिकी हैं। यदि जल्द वार्ता के जरिए समाधान नहीं निकला, तो प्लांट का कामकाज पूरी तरह ठप होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है।