रांची।झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व चेयरमैन और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांगते के 16 महीने के कार्यकाल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सीआईडी की ओर से अदालत में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, श्री ख्यांगते ने अपने कार्यकाल के दौरान परीक्षा प्रक्रियाओं में सरकारी नियमावलियों की जमकर अनदेखी की।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार 27 फरवरी 2025 को कार्मिक विभाग ने उन्हें जेपीएससी का चेयरमैन नियुक्त किया था, जिसके बाद उन्होंने 6 मार्च 2025 को पदभार ग्रहण किया था। जेपीएससी परीक्षाओं में धांधली की शिकायतों और जांच के बाद उन्होंने 21 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस 16 महीने के छोटे कार्यकाल में आयोग द्वारा कुल 36 परीक्षाएं आयोजित की गईं।
सीआईडी जांच में सामने आया है कि परीक्षाओं के आयोजन और संचालन के लिए तय नियमों—विशेषकर 'झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज मैनुअल' और 'आयोग की कार्य प्रक्रिया नियमावली, 2002' को पूरी तरह ताक पर रखा गया।
वित्त विभाग के इस मैनुअल के तहत राज्य की संचित निधि से खर्च चलाने वाले सभी विभाग और संस्थान आते हैं, जिसमें जेपीएससी भी शामिल है। नियमों के अनुसार किसी भी सेवा की खरीद इसी मैनुअल के तहत होनी थी।
जून 2025 में दागी एजेंसी टीडीपीएल को काम आवंटित किए जाने के दौरान इस मैनुअल का पालन नहीं किया गया। 10 लाख रुपये या उससे अधिक के कार्य के लिए खुला टेंडर निकाले जाने के बजाय कथित तौर पर बिना उचित प्रक्रिया के एजेंसी का चयन कर लिया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि जेपीएससी की कार्य प्रक्रिया नियमावली, 2002 के नियमों का उल्लंघन करते हुए परीक्षा के मूल कार्यों और उसकी गोपनीयता को गंभीर रूप से भंग किया गया। ओएमआर शीट का मूल्यांकन आयोग के सुरक्षित परिसर के बजाय लालपुर स्थित टीडीपीएल के निजी आवास पर कराया गया, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
