रांची/नई दिल्ली। हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गयी। कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही लंबे समय से न्यायिक हिरासत में बंद विनय चौबे के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। विनय चौबे ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान विनय चौबे की ओर से अदालत को बताया गया कि वे नवंबर 2025 से इस मामले में न्यायिक हिरासत में हैं। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि इसी मामले के अन्य सह-आरोपी विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को पहले ही अदालत से जमानत मिल चुकी है। ऐसे में समान आधार पर उन्हें भी राहत मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इन तथ्यों पर विचार करते हुए जमानत याचिका मंजूर कर ली।

राज्य सरकार ने किया जमानत का विरोध

सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार की ओर से विनय चौबे की जमानत का विरोध किया गया। सरकार ने अदालत से कहा कि विनय चौबे एक प्रभावशाली अधिकारी रहे हैं और यदि उन्हें रिहा किया गया तो वे मामले से जुड़े गवाहों या अन्य संबंधित लोगों को प्रभावित कर सकते हैं। राज्य सरकार ने यह भी दलील दी कि विनय चौबे अन्य मामलों में भी आरोपी हैं। इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत देने का फैसला सुनाया।

शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द कराने की छूट

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विनय चौबे को निचली अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। यदि वे जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो राज्य सरकार को संबंधित न्यायालय में जाकर जमानत रद्द कराने की मांग करने की स्वतंत्रता होगी।

चर्चित रहा है हजारीबाग वन भूमि घोटाला

हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कर रही है। एसीबी ने इस मामले में अगस्त 2015 में प्रारंभिक जांच दर्ज की थी। इसके लगभग 10 वर्ष बाद नियमित प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, नेक्सजेन के मालिक विनय सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2020-21 में कथित रूप से दबाव बनाकर वन भूमि का म्यूटेशन कराया। इसके अलावा जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2010 से 2015 के बीच ब्रह्मास्त्रा एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी में लगभग 3.16 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए। इस कंपनी में स्निग्धा सिंह निदेशक हैं। इन आरोपों की जांच एसीबी द्वारा की जा रही है और मामले की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।