रांची। रांची में फैटी लीवर रोग की समय रहते पहचान, रोकथाम और उपचार के उद्देश्य से इस माह के अंत तक ‘फैटी लीवर मुक्त राँची’ अभियान की शुरुआत की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ युवा, स्वस्थ भारत’ के संकल्प से प्रेरित इस अभियान को देश में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सबसे पहले राँची में लागू किया जा रहा है। सदर अस्पताल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री और रांची के सांसद संजय सेठ ने अभियान की विस्तृत जानकारी मीडिया से साझा की।
संजय सेठ ने बताया कि यह अभियान इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलीअरी साइंसेज (आईएलबीएस), नई दिल्ली और डॉ. एस.के. सरीन के मार्गदर्शन में सदर अस्पताल द्वारा संचालित होगा।
अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस 4 विशेष वाहनों के जरिए घर-घर और दूर-दराज इलाकों तक पहुँच बनाई जाएगी। इनमें से 2 वाहन राँची पहुँच चुके हैं।अभियान के लिए लगभग ₹1.10 करोड़ की अत्याधुनिक मशीन और ₹40,000 की लागत का वाहन उपलब्ध कराया गया है।
श्री सेठ ने बताया कि एक वर्ष में करीब 1.20 लाख लोगों की अल्कोहलिक और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लीवर जाँच का लक्ष्य तय किया गया है।जिले के 500 चिन्हित स्थानों पर मोबाइल मेडिकल वाहन भ्रमण करेंगे।अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए व्यापक खाका तैयार किया गया है। आशा और एएनएम कार्यकर्ता प्राथमिक जाँच करेंगी। 'ABCD रिस्क स्कोर' के आधार पर उच्च जोखिम वाले मरीजों की पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ परामर्श और उपचार हेतु रेफर किया जाएगा। जिला के सभी प्रखंडों व अनुमंडलीय अस्पतालों के लगभग 1,000 स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।100 से अधिक स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थियों को अभियान से जोड़कर संतुलित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद राँची के सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने बताया कि अस्वस्थ जीवनशैली और गलत खान-पान फैटी लीवर का मुख्य कारण हैं। यदि शुरुआती चरण में ही बीमारी की पहचान हो जाए, तो खान-पान और जीवनशैली में सुधार कर इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
संजय सेठ ने सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली और उपलब्ध कराई जा रही अत्याधुनिक सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि स्वस्थ नागरिक ही 'विकसित भारत' की मजबूत नींव हैं।
