​रांची। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतंत्र की हत्या करने और जानबूझकर वोटरों के नाम काटने का गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें लोकतंत्र के लिए ‘तीन यमराज’ करार दिया है।

​सोमवार को राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। राजधानी रांची के पुराने विधानसभा परिसर से शुरू हुआ यह पैदल मार्च निर्वाचन आयोग के कार्यालय तक पहुँचा। इस दौरान उग्र कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का पुतला दहन किया। प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से निर्वाचन आयोग का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया था।

​प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि पार्टी देश के लोकतंत्र को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और प्रधानमंत्री के हाथों से बचाना चाहती है। इसके लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा बेहद जरूरी है।

​कांग्रेस नेताओं का दावा है कि झारखंड में एसआईआर और एएसडीडी प्रक्रिया के तहत करीब 40 से 45 लाख मतदाताओं के नाम प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है।

​कांग्रेस विधायक दल के नेता ​प्रदीप यादवने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया से आम जनता के मताधिकार प्रभावित हो रहे हैं। आयोग प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता लाए और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखे।

मंत्री ​राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखे। इस एसआईआर अभियान को तुरंत रद्द कर पुरानी मतदाता सूची को बहाल किया जाए।

मंत्री ​इरफान अंसारी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में हो रही कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सीईसी ज्ञानेश कुमार समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।

विधायक दल के उपनेता ​राजेश कच्छप ने कहा कि एसआईआर के जरिए गरीब, दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने नए मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 की जटिल प्रक्रिया और मांगे जा रहे दस्तावेजों पर भी सवाल उठाए।

मंत्री ​शिल्पी नेहा तिर्की ने अपने भाषण में कहा कि लोगों को वोट देने के मौलिक अधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है ताकि भाजपा और मोदी सरकार तानाशाही रवैये के साथ सत्ता पर काबिज रह सके।

​इस विरोध प्रदर्शन में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, बंधु तिर्की, पूर्व मंत्री के.एन. त्रिपाठी, पूर्व विधायक अंबा प्रसाद और रांची महानगर अध्यक्ष कुमार राजा समेत कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।

विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग का घेराव संवैधानिक दबाव बनाने की कोशिश : भाजपा

​रांची। झारखंड भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने रांची में कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग के घेराव की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे संवैधानिक संस्था पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।

​प्रतुल शाहदेव ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर से जुड़े फैसले मिलकर लिए गए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस तथ्यों को दरकिनार कर प्रदर्शन कर रही है।

​उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एम.एस. गिल को कांग्रेस ने राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री बनाया, जबकि विवादों से घिरे नवीन चावला को हटाने की सिफारिश के बावजूद यूपीए सरकार ने उन्हें सीईसी नियुक्त किया। इसके अलावा पूर्व सीईसी टी.एन. शेषन को कांग्रेस ने टिकट देकर चुनाव लड़ाया था और 80 के दशक में आरबीएस शास्त्री के अधिकार सीमित करने के लिए दो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की थी।

​प्रतुल ने कहा कि ज्ञानेश कुमार 2014, 2019 और 2024 के चुनाव में शामिल नहीं थे, फिर भी भाजपा को प्रचंड जीत मिली। कांग्रेस को बेवजह आरोप लगाने के बजाय तथ्य और दस्तावेज सामने रखने चाहिए।