रामगढ़। जेएलकेएम पार्टी सुप्रीमो सह डूमरी विधायक टाइगर जयराम महतो ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के अनुसार, बीती रात जमशेदपुर के बिष्टुपुर इलाके में रात करीब 10:30 बजे से 11:30 बजे के बीच दुकानों में चाय पी रहे, आइसक्रीम खा रहे अथवा खरीदारी के लिए बाहर निकले आम नागरिकों पर पुलिस द्वारा कथित रूप से अचानक लाठी चलाने का मामला सामने आया है। यदि वायरल वीडियो में दिख रहा घटनाक्रम सही है, तो यह बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। शांतिपूर्ण नागरिकों के साथ मारपीट किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती। मैं आम नागरिकों की कथित पिटाई की कड़ी निंदा करता हूं और झारखंड पुलिस के आला अधिकारियों से मांग करता हूं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। वायरल वीडियो में यदि पुलिसकर्मियों द्वारा नियमों का उल्लंघन कर नागरिकों पर लाठी चलाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर आम नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन कानून-व्यवस्था के नाम पर आम जनता को डराना या पीटना पुलिसिंग का विकल्प नहीं हो सकता। यदि रात में बाजारों में लोगों के निकलने पर कोई प्रतिबंध या समय-सीमा निर्धारित है, तो जिला प्रशासन को उसे स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करना चाहिए और उसका पालन कानूनसम्मत तरीके से कराना चाहिए। पुलिस को अपनी ताकत दिखानी है तो बेकाबू अपराध और अपराधियों के खिलाफ दिखाए। जो लोग नशेबाजी, अवैध गतिविधियों अथवा आपराधिक अड्डेबाजी में शामिल हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। शांतिपूर्वक चाय पी रहे परिवारों, दुकानदारों और आम नागरिकों पर लाठी चलाने से अपराध नियंत्रण नहीं होगा। जमशेदपुर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर है। यहां बड़ी संख्या में लोग फैक्ट्रियों और संस्थानों में अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं। देर रात काम खत्म करने के बाद लोग अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताने या आवश्यक खरीदारी के लिए बाहर निकलते हैं। उन्हें सुरक्षा चाहिए, पुलिस की लाठी नहीं। एक ओर सरकार झारखंड में निवेश लाने और राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूत करने के लिए प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि अपराध नियंत्रण के बजाय बाजार बंद कराने और आम नागरिकों को रात में सड़क पर निकलने से डराने की तस्वीर सामने आती है, तो इससे जमशेदपुर और झारखंड की कानून-व्यवस्था को लेकर देश-दुनिया में क्या संदेश जाएगा- इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। जमशेदपुर में अपराध की विभिन्न घटनाओं को लेकर समय-समय पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। बैंक लूट, गोलीबारी, हत्या, चोरी और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसी घटनाओं के बीच आम जनता यह जानना चाहती है कि अपराधियों पर पुलिस का खौफ कब दिखाई देगा?अपराधी अपराध करके फरार हो जाए और उसका खामियाजा आम जनता भुगते हैं। यह कानून का राज नहीं हो सकता। यदि दिन में बैंक लूटे जा सकते हैं, गोलीबारी और अन्य अपराध हो सकते हैं, तो क्या स्कूल-कॉलेज, कार्यालय, बाजार और फैक्ट्रियां भी बंद करा दी जाएंगी? क्या लोगों को घरों में बंद कर देने से अपराध समाप्त हो जाएंगे? निश्चित रूप से अपराध नियंत्रण का रास्ता आम नागरिकों की आवाजाही रोकना नहीं हो सकता। एक तरफ देर रात तक बार और शराब की दुकानों के संचालन की अनुमति से जुड़े नियम लागू हैं, दूसरी तरफ चाय-कॉफी या आइसक्रीम के लिए बाहर निकले आम नागरिकों पर कथित रूप से लाठी चलाने का वीडियो सामने आता है। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि रात में शांतिपूर्वक दुकान पर बैठकर चाय-कॉफी पीना अथवा परिवार के साथ बाहर निकलना आखिर किस परिस्थिति में अपराध माना जा रहा है? वायरल वीडियो में महिलाओं सहित आम नागरिकों को भयभीत अवस्था में देखा जा रहा है और पुलिसकर्मियों द्वारा लाठी चलाने का दृश्य दिखाई देता है। यदि वीडियो की पुष्टि होती है, तो यह पुलिस-जनता संबंधों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। दुकानों को बंद करवाकर और लोगों को डंडे के बल पर घर भेजकर पुलिस अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। इससे जनता में कानून के प्रति सम्मान के बजाय भय और अविश्वास पैदा होने का खतरा है जमशेदपुर की मौजूदा परिस्थितियों को देखकर ऐसा प्रतीत नहीं होना चाहिए कि हम फिर उस दौर की ओर लौट रहे हैं। जब रात होते ही बाजारों में सन्नाटा छा जाता था और लोग भय के कारण घरों से निकलने से कतराते थे। अपराधी खुलेआम अपराध करके निकल जाएं और उसका खामियाजा आम जनता भुगते-यह कानून का राज नहीं हो सकता। मैं मुख्यमंत्री जी और राज्य के पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग करता हूं कि बिष्टुपुर की वायरल घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों पर नियमानुसार कार्रवाई हो तथा आम नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।जनता को अपराधियों से बचाना पुलिस की जिम्मेदारी है, जनता को पुलिस से डराना नहीं।