रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत में याचिकाकर्ताओं और राज्य सरकार, दोनों पक्षों की ओर से जोरदार बहस देखने को मिली। मामले की अगली सुनवाई अब 12 अक्टूबर (सोमवार) को दोपहर 2:15 बजे होगी। तब तक हाईकोर्ट से पूर्व में मिली अंतरिम राहत बरकरार रहेगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने परीक्षा का संचालन करने वाली एजेंसी टीडीपीएल की भूमिका, परीक्षा की पारदर्शिता और पूरी नियुक्ति प्रक्रिया का ब्योरा दिया। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकार द्वारा पूरी परीक्षा रद्द करने का आदेश 'नेचुरल जस्टिस'के सिद्धांतों के खिलाफ है।
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता अच्युत केशव ने परीक्षा रद्द करने के कदम का बचाव किया। सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और गोपनीयता भंग हुई है।
अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि एक मछली पूरे तालाब को दूषित कर देती है।उन्होंने स्पष्ट किया कि धांधली का दायरा इतना व्यापक था कि निर्दोष और दोषी अभ्यर्थियों को अलग करना संभव नहीं रह गया था। ऐसे में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करना ही न्यायसंगत और आवश्यक फैसला था।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जेपीएससी की कार्यप्रणाली और परीक्षा व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जेपीएससी द्वारा अब तक जितनी भी बहाली प्रक्रियाएं आयोजित की गई हैं, उनमें किसी न किसी चरण (कभी पीटी तो कभी मेन्स परीक्षा) में गड़बड़ी और खामियां देखने को मिलती ही हैं।
