​बोकारो। जमशेदपुर के बाद झारखंड का सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र माना जाने वाला बोकारो जिला बेरोजगारी के मामले में राज्य में पहले स्थान पर पहुंच गया है। जिले में स्टील से लेकर बारूद तक का उत्पादन करने वाले दो दर्जन से अधिक बड़े उद्योग स्थापित हैं, इसके बावजूद यहाँ के स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। इस बात का खुलासा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के श्रम एवं रोजगार बाजार सर्वेक्षण की हालिया रिपोर्ट में हुआ है, जिसके अनुसार बोकारो में बेरोजगारी दर 8.5 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज की गई है।

बोकारो जिले में औद्योगिक क्रांति की रीढ़ माने जाने वाले कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के संयंत्र और खदानें कार्यरत हैं। जिनमें मुख्य रूप से बोकारो स्टील प्लांट, इलेक्ट्रोस्टील प्लांट,बोकारो पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड और दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (डीवीसी) के तीन बड़े संयंत्र।

​खनन एवं ऊर्जा के क्षेत्र में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड ,भारत कोकिंग कोल लिमिटेड ,ओएनजीसी का पर्वतपुर कोल बेड मीथेन ब्लॉक और अमलाबाद कोल ब्लॉक।

​विस्फोटक व रसायन में गोमिया स्थित देश का प्रमुख बारूद कारखाना (आईईएल) है।

​इसके अतिरिक्त बोकारो औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) के अंतर्गत 400 से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां पंजीकृत हैं, जिनमें से लगभग 40 से अधिक बड़ी इकाइयों में भारी पैमाने पर उत्पादन और व्यावसायिक गतिविधियां जारी हैं। इनमें डालमिया सीमेंट, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का एलपीजी बॉटलिंग प्लांट और सुंदरम स्टील जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

इतनी बड़ी संख्या में कल-कारखाने होने के बाद भी जिले की स्थिति सबसे खराब होने के पीछे मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर रोजगार भर्ती की ठोस नीति और प्रशासनिक नियंत्रण का न होना है। निजी व आउटसोर्सिंग कंपनियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने या नौकरी के तय मापदंड लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई मजबूत व्यवस्था नहीं बनाई गई है। पारदर्शी नियोजन नीति के अभाव में औद्योगिक इकाइयां स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने के बजाय उपेक्षा कर रही हैं, जिससे क्षेत्र के युवाओं में गहरा असंतोष है।