​रांची। गिरिडीह स्थित जैन समाज के पवित्र तीर्थस्थल पारसनाथ पर्वत पर जैन और आदिवासी समाज के बीच उपजे मतभेदों को सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग की गई है। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन, रांची ने गृह मंत्री को पत्र लिखकर सभी संबंधित पक्षों के साथ संवाद स्थापित कर एक स्थायी, न्यायसंगत और सर्वमान्य समाधान निकालने की अपील की है।

​मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि पारसनाथ पर्वत जैन समाज की आस्था का एक अत्यंत पवित्र केंद्र है, जहाँ अनेक तीर्थंकरों की मोक्ष स्थली होने के कारण देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी धार्मिक भावनाएँ जुड़ी हैं। वहीं, इस क्षेत्र से स्थानीय आदिवासी समाज की पारंपरिक, सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाएँ भी जुड़ी हुई हैं। दोनों समुदायों के अधिकारों और आस्थाओं से जुड़े होने के कारण यह विषय बेहद संवेदनशील बन गया है।

​केंद्र सरकार के स्तर पर एक उच्चस्तरीय संवाद एवं समन्वय समिति बनाई जाए, जिसमें जैन समाज, आदिवासी समाज, झारखंड सरकार, स्थानीय प्रशासन और विशेषज्ञों के प्रतिनिधि शामिल हों।

​ पारसनाथ पर्वत की जैन तीर्थस्थल के रूप में पवित्रता सुरक्षित रहे, साथ ही आदिवासी समाज के पारंपरिक, सांस्कृतिक और वैधानिक अधिकारों का भी पूर्ण सम्मान किया जाए।

​भविष्य में किसी भी टकराव को रोकने के लिए दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच नियमित बातचीत की एक स्थायी प्रणाली विकसित की जाए।

​क्षेत्र में पर्यटन, धार्मिक गतिविधियों और विकास कार्यों के लिए ऐसी नीति बने जिससे स्थानीय आजीविका और पर्यावरण की रक्षा हो सके।

​सुरेश चंद्र अग्रवाल ने कहा कि पारसनाथ केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और झारखंड की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी एक पक्ष की अनदेखी के बजाय आपसी बातचीत, संवैधानिक व्यवस्था और परस्पर सम्मान के जरिए ही इसका समाधान संभव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गृह मंत्री के मार्गदर्शन से जैन समाज की धार्मिक आस्था सुरक्षित रहेगी और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ आपसी भाईचारा भी मजबूत होगा।