रांची/हजारीबाग। झारखंड हाईकोर्ट ने करीब 13 साल पुराने एक हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए दोषी करार दिए गए सिपाही मोहम्मद खलील की उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया है। जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है।
यह पूरा मामला बड़कागांव थाना कांड संख्या 42/2009 से जुड़ा हुआ है। 21 मार्च 2009 को हजारीबाग जिले के पसेरिया गांव स्थित पुरानटोला से लगभग एक किलोमीटर दूर पहाड़ी नाले के पास एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ था। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जब्त कर जांच शुरू की, जिसकी पहचान बाद में ममता रानी डे उर्फ रीता डे के रूप में हुई। तफ्तीश के दौरान सिपाही मोहम्मद खलील का नाम इस मामले में सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य छिपाना) के तहत चार्जशीट दाखिल की थी।
हजारीबाग के आठवें अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 16 सितंबर 2013 को मोहम्मद खलील को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी करार दिया था। 17 सितंबर 2013 को सजा के बिंदु पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने उसे उम्रकैद और 10,000 रुपये जुर्माना, तथा साक्ष्य छिपाने के मामले में सात साल की कठोर कैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी (दोनों सजाएं साथ चलनी थीं)।
निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए मोहम्मद खलील ने झारखंड हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि और सजा के पूरे आदेश को निरस्त कर दिया है।
