गुमला। सूचना का अधिकार कानून 2005 (आरटीआई) के 21 साल पूरे होने पर भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच के तत्वावधान में गुमला के सुदूरवर्ती इलाके घटगांव पंचायत के पहाड़ पनारी गांव में आरटीआई गोष्ठी का विशेष आयोजन किया गया। इसमें 'लोकतंत्र में आरटीआई की भूमिका' पर विशेष चर्चाएं हुईं। कई ग्रामीणों ने इस दौरान ताज्जुब जताते कहा कि उन्हें अब तक इस कानून की जानकारी ही नहीं थी। इस दौरान मंच के राज्य सचिव एवं आरटीआई कार्यकर्ता आनंद किशोर पंडा ने ग्रामीणों को आरटीआई के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही लोकतंत्र में आरटीआई का महत्व, आरटीआई आवेदन एवं अपीलीय प्रकिया तथा सूचना आयोग की ताकत पर प्रकाश डालते हुए लोगों के बीच आरटीआई बुकलेट का वितरण किया। उन्होंने कहा कि 12 अक्टूबर 2005 को भारतीय संसद द्वारा अधिनियमित यह सूचना का अधिकार महत्वपूर्ण कानून झारखण्ड सहित पूरे देश में लागू हुआ जिसका आज हम सभी इक्कीसवीं वर्षगांठ मना मना रहे हैं। सन् 2005 ई० में हमें जानने का मौलिक अधिकार मिला और हम सूचना का अधिकार के तहत सरकार के हर गतिविधियों को जान सकते हैं। उन्होंने सरकार के स्तर से इसके लिए जागरूकता अभियान नहीं चलाये जाने पर निराशा जतायी। मंच की ओर से विरेन्द्र तिर्की ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून को सरकारी स्तर से बिल्कुल नेस्तनाबूद कर दिया गया है। झारखण्ड राज्य सूचना आयोग का लगभग छः वर्षो से निष्क्रिय है। आयोग की निष्क्रियता का फायदा उठाकर अधिकारीगण लोगों को चाही गई सूचनाएं जानबूझकर मुहैया नहीं करा रहे हैं।