रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (सीएमपीएफओ) के 727.67 करोड़ रुपये डूबने के मामले में बड़ा कदम उठाते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी पक्षों की बहस सुनी और जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपने का निर्देश दिया।
यह जनहित याचिका 'कोल इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन' की ओर से कोर्ट में दाखिल की गई थी।
यह मामला सीएमपीएफओ द्वारा दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) में किए गए एक भारी-भरकम निवेश से जुड़ा है। याचिका में बताया गया था कि सीएमपीएफओ ने कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड का लगभग 1,300 करोड़ रुपये डीएचएफएल में निवेश किया था। इसके बाद डीएचएफएल कंपनी दिवालिया हो गई, जिससे यह पूरा निवेश फंस गया।
हालांकि कुछ रकम की रिकवरी हो सकी, लेकिन कर्मचारियों के करीब 727.67 करोड़ रुपये पूरी तरह डूब गए। कर्मचारियों के संगठन ने इस संदिग्ध निवेश और फंड के डूबने पर गंभीर सवाल उठाते हुए अदालत से निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।
