​बोकारो। बोकारो जिले के कसमार थाना क्षेत्र में सियार का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। सियार के हमले में दो ग्रामीणों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हैं। इस त्रासदी ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि सदर अस्पताल द्वारा एंटी-रेबीज वैक्सीन दिए जाने के बावजूद दो लोगों ने दम तोड़ दिया। मौत से पहले पीड़ितों में सियार जैसी आवाज निकालने और असामान्य व्यवहार (रेबीज के लक्षण) देखने को मिले।

​जानकारी के अनुसार, 12 अगस्त को कसमार प्रखंड के छह गांवों (नावाडीह, बगदा, टांगटोना, पुरनी बगियारी, रघुनाथपुर और लालमटिया) में सियार ने अचानक हमला कर 12 ग्रामीणों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कसमार और सदर अस्पताल बोकारो में भर्ती कराया गया, जहाँ उन्हें रेबीज का टीका लगाया गया।

​इलाज के बाद ग्रामीण सामान्य महसूस कर रहे थे, लेकिन 3 सितंबर को दुर्गापुर पंचायत के ललमटिया गांव निवासी बुधनी देवी (33 वर्ष) की मौत हो गई। इसके बाद 17 सितंबर को टांगटोना पंचायत के तेलियाडीह निवासी 75 वर्षीय राधा महतो ने भी दम तोड़ दिया।

​मृतक राधा महतो के भतीजे फूलचंद महतो ने बताया कि 12 अगस्त को खेत में काम करने के दौरान सियार ने उनके चाचा पर हमला किया था। पूरा कोर्स वैक्सीन लेने के बाद वे बिल्कुल ठीक थे। हालांकि, 17 सितंबर की सुबह अचानक उनकी स्थिति बिगड़ने लगी। वे सामान्य बातचीत की जगह सियार जैसी आवाजें निकालने लगे। परिजन उन्हें सीएचसी कसमार ले गए, जहां से उन्हें रिम्स (रांची) रेफर किया गया। लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

​सियार के हमले और दो मौतों के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है। घटना में घायल अन्य ग्रामीण—रूही कुमारी (4.5 वर्ष), राहुल महतो (32), राहुल कुमार (25), सागर कुमार स्वर्णकार (47), लालमणि देवी (30), पार्वती देवी (30), राकेश कुमार महतो (10), जुली कुमारी (17), अनूप कुमार महतो (30) और झालु देवी (65 वर्ष)—संभावित संक्रमण के डर से गहरे मानसिक तनाव और भय में जी रहे हैं।

​सरकारी स्तर पर दी गई वैक्सीन के अप्रभावी साबित होने से ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी आक्रोश है और वे कोल्ड चेन रखरखाव या डुप्लीकेट वैक्सीन की जांच की मांग कर रहे हैं।