रांची। बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीआईटी), मेसरा में शनिवार को 36वां दीक्षांत समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के कुल 2,984 विद्यार्थियों को डिग्रियां और डिप्लोमा प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत इस समय तकनीकी बदलाव के एक बेहद महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में हो रही तीव्र प्रगति से देश में नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।
डॉ. मोहंती ने इस बात पर जोर दिया कि 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को अपनी तकनीकी क्षमताओं को और अधिक मजबूत करना होगा। इसके लिए कुशल वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और उद्यमियों के साथ-साथ निरंतर शोध,सहयोग और मानव संसाधन में निवेश बेहद जरूरी है। उन्होंने बीआईटी मेसरा की शोध और तकनीकी विकास में निभाई जा रही भूमिका की सराहना करते हुए विद्यार्थियों से हमेशा जिज्ञासु बने रहने, लगातार सीखते रहने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता के साथ-साथ चरित्र और ईमानदारी भी जीवन में उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
वहीं, संस्थान के कुलाधिपति सीके बिड़ला ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने ज्ञान और अवसरों का इस्तेमाल समाजोपयोगी कार्यों में करें। उन्होंने बदलते दौर की जरूरतों को रेखांकित करते हुए कहा कि आज तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ खुद को लगातार अपडेट रखने, बदलावों के अनुरूप ढलने और विभिन्न विषयों के बीच तालमेल बनाकर काम करने की क्षमता ही सफलता की कुंजी है।
