बोकारो। बेरमो अनुमंडल में विकास योजनाओं का श्रेय लेने की राजनीति इस कदर हावी हो चुकी है कि सरकारी नियमों और मर्यादाओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जैनामोड़-तिलकामांझी चौक से बेरमो तक लगभग 16 किलोमीटर लंबी सड़क (लागत ₹158 करोड़) के मजबूतीकरण कार्य के शिलान्यास को लेकर गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और बेरमो विधायक कुमार जयमंगल (अनुप सिंह) आमने-सामने आ गए। सड़क के एक छोर पर विधायक ने, तो दूसरे छोर पर सांसद ने अलग-अलग समय पर शिलान्यास पट्टिका का अनावरण किया।
शिलान्यास के दौरान बेरमो विधायक कुमार जयमंगल का एक नया और विवादास्पद रूप देखने को मिला। सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर हाल ही में एनडीए घटकों द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन (सड़क पर धान रोपने) की खबर प्रमुखता से छापने पर विधायक पत्रकारों पर ही भड़क गए। उन्होंने पत्रकारों की जमकर आलोचना की और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को देश के लिए 'खतरा' तक करार दे दिया।
विधायक यहीं नहीं रुके, उन्होंने मीडियाकर्मियों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्हें विकास विरोधी तक कह डाला। उन्होंने तर्क दिया कि जब सड़क का टेंडर उनके प्रयासों से हो चुका था, तब एनडीए के श्रेय लेने वाले आंदोलन को मीडिया में जगह क्यों मिली?
उल्लेखनीय है कि विधायक कुमार जयमंगल के पिता स्व. राजेंद्र प्रसाद सिंह (पूर्व मंत्री, बिहार व झारखंड सरकार) अपनी सौम्य छवि और पत्रकारों को सम्मान देने के लिए जाने जाते थे। उनके पुत्र द्वारा खुले मंच से मीडिया के प्रति ऐसे अमर्यादित और आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल ने राजनीतिक व सामाजिक गलियारों में लोगों को हतप्रभ कर दिया है।
सांसद का तीखा हमला: "गुणवत्ता ताक पर, बेरमो में फल-फूल रहा भ्रष्टाचार"
सड़क के दूसरे किनारे पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने विधायक का नाम लिए बिना उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। सांसद ने कहा कि क्षेत्र में बन रही सड़कों और नालियों में गुणवत्ता का कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है और अपने चहेते ठेकेदारों से घटिया काम कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि नगर परिषद और सीसीएल क्षेत्र से बिना एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लिए निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। सांसद ने चेतावनी दी कि इन घटिया निर्माण कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई तय की जाएगी।
बोकारो जिले में एक ही योजना का दो-दो बार शिलान्यास होना अब आम बात बन चुकी है। दो दिन पूर्व बोकारो में भी ऐसी ही घटना देखने को मिली थी। इससे पहले चंदनक्यारी और बोकारो विधानसभा को जोड़ने वाली एक सड़क का शिलान्यास भी सत्ताधारी गठबंधन के ही दो विधायकों—श्वेता सिंह और उमाकांत रजक—ने अलग-अलग किनारों पर किया था।
सरकारी प्रावधानों के अनुसार केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी योजना के शिलान्यास या उद्घाटन के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित हैं।योजना स्थल से संबंधित क्षेत्र के सांसद, विधायक, जिला परिषद अध्यक्ष, नगर परिषद/निगम अध्यक्ष और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाना चाहिए।शिलान्यास के शिलापट्ट पर इन सभी जनप्रतिनिधियों के नाम प्रोटोकॉल के अनुसार अंकित होने चाहिए।
इसके बावजूद, जनप्रतिनिधि अपने राजनीतिक स्वार्थ और श्रेय लेने की होड़ में इन नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
