​रांची। चिकित्सकों की सुरक्षा, सम्मान और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर झारखंड में आईएमए झारखंड संयुक्त चिकित्सा आंदोलन के तहत मंगलवार से 20 अक्टूबर तक काला बिल्ला लगाकर विरोध की शुरुआत हो गई है। राज्यभर के सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर काला कपड़ा व बिल्ला लगाकर अपने कार्यस्थलों पर ड्यूटी करते नजर आए।

​इस आंदोलन में कुल 10 प्रमुख चिकित्सा संगठन शामिल हैं, जिनमें प्रमुख रूप से आईएमए झारखंड स्टेट ब्रांच, झासा, आईएमए हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया, एएचपीआई आईएमए महिला विंग, जेडीए और जेडीएन शामिल हैं।

राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में 14अक्टूबर को सहभागी चिकित्सा संगठनों द्वारा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी। इसके बाद संबंधित उपायुक्त को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा।​21 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।​22 अक्टूबर को मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में पूर्ण कार्य बहिष्कार प्रस्तावित है। हालांकि, इस दौरान आपातकालीन एवं जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएँ सुचारू रूप से जारी रहेंगी।

​चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट' का प्रभावी क्रियान्वयन,क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट में व्यावहारिक संशोधन,डीएसीपी के अंतर्गत समयबद्ध करियर प्रगति, नियमित नियुक्तियाँ और दंत चिकित्सकों के लिए भी डीएसीपी का लाभ,आयुष्मान भारत से जुड़ी समस्याओं का समाधान, स्वास्थ्य संस्थानों के लिए सिंगल-विंडो लाइसेंसिंग व्यवस्था और महिला चिकित्सकों की सुरक्षा व सम्मान के मुद्दे पर यह आंदोलन शुरू हुआ है।

​चिकित्सा संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है, बल्कि डॉक्टरों के लिए सुरक्षित माहौल और जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए है। संगठनों ने सरकार से अपील की है कि जायज मांगों पर सकारात्मक संवाद स्थापित कर समयबद्ध कार्रवाई की जाए।