रांची/धनबाद। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए), झारखंड ने यूपीआई के पात्र व्यापारी लेन-देन पर लागू 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) का कड़ा विरोध किया है। इसके विरोध स्वरूप एसोसिएशन ने 2 अक्टूबर 2026 को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने की घोषणा की है।
नियमों के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेन-देन पर 0.4% एमडीआर तय किया गया है, जो ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतानों पर अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगा। हालांकि पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर, ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान और निर्धारित श्रेणी के छोटे व्यापारी इससे मुक्त हैं।
मोबाइल रिटेल व्यापार में बिल की राशि प्रायः ₹2,000 से अधिक ही होती है, जिससे इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी मार इसी क्षेत्र पर पड़ रही है। एआईएमआरए के अनुसार देश भर के करीब 1.5 लाख मोबाइल रिटेलर्स पर इस व्यवस्था से सालाना लगभग ₹500 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। अत्यंत कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए यह लागत वहन करना एक गंभीर संकट बन गया है। एआईएमआरए झारखंड के प्रदेश महासचिव अमृत दास ने कहा कि देश के मोबाइल रिटेलर्स ने डिजिटल भुगतान को घर-घर पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई है। यदि डिजिटल पेमेंट स्वीकारने पर ही व्यापारियों पर आर्थिक दंड जैसा भार डाला जाएगा, तो इससे 'डिजिटल इंडिया' की मूल भावना प्रभावित होगी। हमारी सरकार से स्पष्ट माँग है कि व्यापारियों के लिए यूपीआई पर ज़ीरो एमडीआर की व्यवस्था बहाल रखी जाए।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सांकेतिक विरोध डिजिटल इंडिया या यूपीआई तकनीक के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यापारियों पर थोपे गए एमडीआर शुल्क के विरोध में है।
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर विरोध जताते हुए रिटेलर्स यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे। इस दिन व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढककर शांतिपूर्ण और सांकेतिक प्रदर्शन दर्ज कराएँगे। एआईएमआरए झारखंड ने केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय और संबंधित निकायों से व्यापारी हितों को देखते हुए इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने की अपील की है।
