रांची। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस और विपक्षी 'इंडी' गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के आधिकारिक संयुक्त बयान ने विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठ, भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। लगातार मिल रही चुनावी हार से हताश होकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल संवैधानिक संस्थाओं की साख पर सवाल उठाकर देश की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान आदित्य साहू ने कहा कि लूट, झूठ और फरेब कांग्रेस के स्वभाव में शामिल हो चुका है। चुनाव आयोग की बैठक और जारी संयुक्त प्रेस नोट से स्पष्ट हो चुका है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) सहित सभी प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से निष्पक्ष रूप से लिए गए थे। विपक्ष का 'मतभेद' का दावा पूरी तरह काल्पनिक और झूठा है।
उन्होंने कहा कि चाहे चुनाव आयोग हो या सर्वोच्च न्यायालय, कांग्रेस अपनी राजनीतिक खीझ निकालने के लिए हर संस्था को बदनाम करती है। फॉर्म-6 के घोषणापत्र को सर्वोच्च न्यायालय पहले ही वैध ठहरा चुका है, जिससे विपक्ष की साजिश फिर नाकाम हुई है।
श्री साहू ने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें न तो देश के लोकतंत्र पर भरोसा है और न ही वीर सैनिकों के शौर्य पर। राफेल मामला, बालाकोट एयर स्ट्राइक से सबूत मांगना हो या तवांग झड़प पर बयानबाजी, कांग्रेस नेतृत्व ने बार-बार देश और सेना का अपमान किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग हर पात्र नागरिक को मताधिकार देने के लिए कटिबद्ध है। चुनाव आयोग के कड़े और स्पष्ट बयान के बाद अब कांग्रेस नेतृत्व को देश और सभी संवैधानिक संस्थाओं से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
मज़ाक उड़ाने वाले आज राहुल गांधी के सवालों से कांप रहे हैं: कांग्रेस
रांची। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों पर करारा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को ‘मंदबुद्धि’, ‘दिवालिया’ और ‘पप्पू’ कहकर मज़ाक उड़ाने वाले प्रधानमंत्री और भाजपा नेता आज उन्हीं के उठाए सवालों पर सफाई देने के लिए मजबूर हो गए हैं। राहुल गांधी ने जिस ‘वोट चोरी’ और एसआईआर को लेकर लगातार देश को आगाह किया, अब चुनाव आयोग के भीतर से सामने आई गंभीर आपत्तियों ने उन सवालों पर मुहर लगा दी है।
आलोक दूबे ने कहा कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ काम कर रहे दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़ी प्रक्रियाओं और फैसलों पर कम-से-कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन आपत्तियों में मतदाता जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और निर्णयों की जानकारी से जुड़े गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जिस बात को राहुल गांधी वर्षों से कह रहे थे, उसे भाजपा नेता झूठ बताकर उन्हें बदनाम करते रहे। अब जब चुनाव आयोग के अंदर से ही सवाल उठ रहे हैं, तो भाजपा नेताओं के चेहरे पर परेशानी साफ दिखाई दे रही है।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार समेत जिन लोगों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, उन्हें देश की जनता को जवाब देना होगा। राहुल गांधी द्वारा कानूनी जवाबदेही की बात कहना किसी व्यक्ति को धमकी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग है। वक्त आने पर चुनावी प्रक्रिया से खिलवाड़ करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी।
आलोक दूबे ने कहा कि देश का संविधान किसी प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, भाजपा या चुनाव आयोग की निजी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह जनता का है। पिछले कुछ वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को कमजोर करने की कोशिश की गई है। महाराष्ट्र, हरियाणा, कर्नाटक, बिहार और बंगाल के चुनावों तथा एसआईआर प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल इसी चिंता को गहरा करते हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी सवाल पूछते हैं तो भाजपा प्रवक्ता बचाव में उतर आते हैं—आखिर चुनाव आयोग पर उठने वाले सवालों का दर्द भाजपा नेताओं को क्यों होता है।
श्री दूबे ने कहा कि राहुल गांधी को कमजोर साबित करने में लगी भाजपा आज उन्हीं के उठाए मुद्दों पर राजनीति करने को मजबूर है। देश की जनता को राजनीतिक जुमले नहीं, बल्कि अपने वोट की गारंटी और चुनावी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता चाहिए। कांग्रेस हर योग्य नागरिक के मताधिकार और संविधान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अंतिम दम तक संघर्ष करेगी।
