नई दिल्ली/रांची। नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी काउंसिल की बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य के आर्थिक हितों और राजस्व घाटे का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और भारत के आर्थिक विकास में झारखंड के महत्वपूर्ण योगदान का जिक्र किया। उन्होंने राज्य के बढ़ते राजस्व बोझ को कम करने के लिए कोयले को जीएसटी के दायरे से बाहर कर उस पर राज्य वैट लगाने की अनुमति मांगी।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान जीएसटी व्यवस्था के तहत अंतर-राज्यीय कोयला बिक्री पर मिलने वाले आईजीएसटी से उत्पादक राज्यों को सीधा कर लाभ नहीं मिल पाता। यदि कोयले को वैट के दायरे में लाया जाता है, तो इससे कोयला-उत्पादक राज्यों के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। साथ ही बिजली उत्पादन पर टैक्स का बोझ भी 18% से घटकर 5% पर आ जाएगा, जिससे आम जनता को भी राहत मिलेगी।
झारखंड के राजस्व नुकसान का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि
जीएसटी दर-युक्तिकरण के कारण राज्य को लगभग 4,000 करोड़ का नुकसान हुआ।वीबी जी रामजी फंडिंग व्यवस्था में बदलाव से 4,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रभाव पड़ा।
खान एवं खनिज संशोधन अधिनियम (एमएमडीआर एक्ट) में हालिया बदलावों के कारण 14,000 करोड़ का नुकसान/अतिरिक्त वित्तीय बोझ झेलना पड़ा है।
मंत्री ने केंद्र के पास लंबे समय से लंबित 1.36 लाख करोड़ की पुरानी बकाया राशि को जल्द जारी करने की मांग की। इसके अलावा, जीएसटी मुआवजा उपकर की अवधि समाप्त होने से राज्य को सालाना करीब 2,500 करोड़ के राजस्व अंतर का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से इस वित्तीय क्षति की भरपाई के लिए एक वैकल्पिक सहायता व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया और जीएसटी डेटा में पारदर्शिता को अनिवार्य बताया।
