​रांची। झारखंड विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शराब नीति मामले को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर एक पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने वसूली के बड़े हिस्से के कारण राज्य के हितों की रक्षा करने के बजाय शराब माफियाओं के खेल को बढ़ावा दिया।

बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कोर्ट में दायर रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ के अनवर ढेबर ने झारखंड की शराब नीति में बदलाव कराने के लिए मुख्यमंत्री के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय चौबे को 50 करोड़ रुपये की घूस दी थी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ मॉडल लागू करने और अरुणपति त्रिपाठी को जेसीबीसीएल का सलाहकार नियुक्त करने के लिए 5 करोड़ रुपये अलग से दिए गए थे। मरांडी ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम के लेन-देन, नीति में बदलाव और सलाहकार की नियुक्ति की जानकारी क्या मुख्यमंत्री कार्यालय को नहीं थी?

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब शराब नीति संशोधन की रूपरेखा बन रही थी, तब उन्होंने खुद मुख्यमंत्री को प्रमाण सहित पत्र लिखकर संभावित घोटाले के प्रति सचेत किया था। टेंडर से पहले ही बता दिया गया था कि किन लोगों को फायदा पहुँचाने की तैयारी है। इसके बावजूद चेतावनी को नजरअंदाज किया गया।

श्री मरांडी ने रायपुर भेजी गई अधिकारियों की टीम पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकारियों ने छुट्टी के दिन, महज 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट तैयार कर छत्तीसगढ़ मॉडल अपनाने की सिफारिश कर दी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच का जिक्र करते हुए मरांडी ने आरोप लगाया कि जब जांच की आंच ऊपर तक पहुँचने लगी, तो मुख्य आरोपियों और सरगना को बचाने के लिए एसीबी के जरिए मोहरों को गिरफ्तार कराया गया। बाद में बिना चार्जशीट दाखिल किए उन्हें जेल से बाहर निकलने का रास्ता दिया गया ताकि जांच बाधित हो सके।

श्री ​मरांडी ने कहा कि सत्ता की चालाकियां हमेशा कानून से बड़ी नहीं हो सकतीं। कानून अपना काम करेगा और राज्य के गरीबों, दलितों व आदिवासियों का हक मारने वाले असली दोषियों को जवाब देना ही पड़ेगा।

जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दे भाजपाः आलोक दूबे

​रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने शराब नीति पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर लगाए गए आरोपों पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी व भाजपा को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति अब तथ्यों के बजाय सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह गई है।

श्री ​दूबे ने सवाल उठाया कि जब मामले की जांच एसीबी, ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियां कर रही हैं, तो भाजपा में इतनी बेचैनी क्यों है? उन्होंने कहा कि भाजपा को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसे किस जांच एजेंसी पर भरोसा है। जांच और कार्रवाई दोनों ही स्थितियों में सवाल उठाना भाजपा की विरोधाभासी मानसिकता को दर्शाता है।

​कांग्रेस महासचिव ने कहा कि जांच पूरी होने या न्यायालय के निर्णय से पहले किसी को दोषी ठहराना न्याय की मूल भावना के खिलाफ है। यदि बाबूलाल मरांडी के पास कोई ठोस तथ्य या प्रमाण हैं, तो उन्हें सोशल मीडिया पर बयानबाजी करने के बजाय जांच एजेंसियों या अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। झारखंड की जनता राजनीतिक बयानबाजी के बजाय निष्पक्ष जांच और सत्य सामने आने का इंतजार कर रही है।