रांची। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जमशेदपुर के उडुपी रेस्टोरेंट में हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी की घटना पर आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन में योग्यता की जगह राजनीतिक वफादारी, चाटुकारिता और सेटिंग के आधार पर पद बांटे जा रहे हैं, जिसके कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और राज्य में डर का माहौल बन गया है।
बाबूलाल मरांडी ने एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि रिटायर्ड अधिकारियों को डीजीपी बनाने के गैर-कानूनी सिलसिले ने पुलिस की निष्पक्षता और गरिमा को चोट पहुंचाई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मनोज कौशिक, मयूर पटेल, पंकज कंबोज और नरेंद्र कुमार सिंह जैसे चहेते अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण पदों का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि अजय लिंडा, असीम विक्रांत मिंज और माइकल राज जैसे अनुभवी व सक्षम अधिकारियों को दरकिनार किया जा रहा है।
श्री मरांडी ने बोकारो और धनबाद में कोयला तस्करी को दिए गए कथित संरक्षण और अधिकारियों की हिस्सेदारी के पुराने आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे अधिकारी राकेश बंसल को चार महीने से अधिक समय तक पदस्थापन न दिए जाने पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सलाह दी कि केवल घटना के बाद अधिकारियों को मौके पर भेजना शासन नहीं है। उन्होंने मांग की कि अपराधियों को संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई की जाए और पुलिस बल में वफादारी के बजाय योग्यता, ईमानदारी और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाए।
