बोकारो। जिले के चंदनकियारी (सियालजोरी) स्थित इलेक्ट्रोस्टील वेदांता स्टील प्लांट के मुख्य गेट पर जमीन दाता रैयत मजदूरों का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल छठे में प्रवेश कर गया। लगातार छह दिनों से अन्न-जल त्यागने के कारण कई आंदोलनकारियों का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा है। इसके बावजूद न तो कंपनी प्रबंधन और न ही जिला प्रशासन की ओर से अब तक वार्ता की कोई ठोस पहल की गई है।

धरने पर बैठे रैयत मजदूर नेता सुरेश महतो ने बताया कि जिस जमीन पर आज हजारों करोड़ का प्लांट खड़ा है, वह स्थानीय रैयतों की है। प्लांट स्थापना के समय कंपनी ने हर विस्थापित परिवार के एक सदस्य को योग्यता के अनुसार स्थायी नौकरी, उचित मुआवजा और पुनर्वास सुविधाओं का वादा किया था।

सुरेश महतो के अनुसार हम पिछले 10-12 वर्षों से ठेका मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। 12 घंटे काम कराने के बाद महज 10 से 12 हजार रुपये दिए जाते हैं। न समय पर पीएफ-ईएसआई मिलता है और न ही सुरक्षा उपकरण। हक मांगने पर ठेकेदार काम से निकालने की धमकी देता है, जिससे तंग आकर हमें भूख हड़ताल पर बैठना पड़ा।

छह दिन बीत जाने के बाद भी चंदनकियारी के स्थानीय विधायक और क्षेत्रीय सांसद के धरना स्थल पर न पहुंचने से रैयतों में भारी आक्रोश है। धरनास्थल पर मौजूद एक महिला आंदोलनकारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय सब हाथ जोड़कर वोट मांगने आते हैं, लेकिन आज भूखे-प्यासे बैठे लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से निराश रैयतों को अब डुमरी विधायक 'टाइगर' जयराम महतो से आखिरी उम्मीद है। आंदोलनकारियों का कहना है कि झारखंड में विस्थापितों और मजदूरों के हक के लिए निडर होकर आवाज उठाने वाले एकमात्र नेता वही हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि जयराम महतो इस आंदोलन को सही दिशा देंगे और विधानसभा में उनकी मांग उठाएंगे।

धरना स्थल पर आसपास के गांवों से भी लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैं। रैयतों ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी प्रबंधन ने अपनी हठधर्मिता छोड़कर जल्द सकारात्मक वार्ता शुरू नहीं की, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी इलेक्ट्रोस्टील वेदांता प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी।