रांची। झारखंड सरकार ने राज्य में मानव तस्करी की समस्या के स्थाई निदान के लिए व्यापक स्तर पर पहल शुरू की है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा "विकटीम प्रोटेक्शन प्लान" (वीपीपी) पर आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों की सुरक्षा, पुनर्वास और पुनर्समावेशन को सुदृढ़ करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला में समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, गरिमा एवं सामाजिक न्याय से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा है।
समाज कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी ने मानव तस्करी के मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हुए बचाव, संरक्षण और पुनर्वास की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जिला स्तर पर संस्थागत तंत्र को मजबूत करने और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स के क्षमता संवर्धन पर विशेष बल दिया। इसके अलावा वन स्टॉप सेंटर और शक्ति सदन जैसी पुनर्वास सेवाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ पीड़ितों को कानूनी सहायता, परामर्श और आजीविका समर्थन देना राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कार्यशाला के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के प्रज्वला बनाम भारत संघ मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले और उसके तहत जारी वीपीपी के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में मान्यता प्राप्त कल्याणकारी संस्थाओं की अधिसूचना, सामाजिक कार्यकर्ताओं के राज्यव्यापी पैनल के गठन, नोडल अधिकारियों के नामांकन और प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर सहमति बनी।
इस राज्य स्तरीय कार्यशाला में गृह, पुलिस, श्रम, शिक्षा, स्वास्थ्य, विधिक सेवा प्राधिकरण और मिशन शक्ति सहित कई प्रमुख विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
