रांची। राज्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने और नदियों के आसपास के क्षेत्रों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने के लिए झारखंड सरकार जल्द ही "झारखंड फ्लड प्लेन जोनिंग एक्ट 2026" लागू करने जा रही है। जल संसाधन विभाग ने इस कानून का प्रारूप तैयार कर लिया है। इसे अंतिम रूप देने से पहले आम जनता, औद्योगिक व व्यावसायिक इकाइयों और सभी संबंधित पक्षों से अगले 30 दिनों के भीतर सुझाव व मंतव्य आमंत्रित किए गए हैं।
नदियों के वैज्ञानिक सीमा निर्धारण पर जोर
जल संसाधन विभाग के अनुसार झारखंड में कई सदाबहार और मौसमी नदियां बहती हैं, जो राज्य के शहरी, ग्रामीण, औद्योगिक, खनन और कृषि क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। मानसून के दौरान नदियों में आने वाली बाढ़ और भू-कटाव से जान-माल, बुनियादी ढांचे, फसलों और पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचता है।
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार एक गैर-संरचनात्मक और निवारक दृष्टिकोण अपना रही है। इसके तहत नदियों, उनकी सहायक नदियों और जल निकासी तंत्र से जुड़े क्षेत्रों की वैज्ञानिक पहचान कर उन्हें बाढ़ सुरक्षा की दृष्टि से विभिन्न ज़ोन में विभाजित और विनियमित किया जाएगा।
एक्ट का पूरा प्रारूप जल संसाधन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।प्राप्त सभी सुझावों की विभागीय समीक्षा के बाद जो आवश्यक संशोधन होंगे, उन्हें अंतिम अधिनियम में शामिल किया जाएगा।
