रांची। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा है कि नशे की चुनौती केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि युवाओं और समाज के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। इसे पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों और समुदायों की साझा जिम्मेदारी बनाकर जमीनी स्तर पर प्रभावी जनआंदोलन का रूप देना होगा।
वे मंगलवार को एमडीआई बिल्डिंग, प्रोजेक्ट भवन में आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला"भारत में नशे की रोकथाम और इसकी मांग घटाने की नई सोच"को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के निर्देश पर महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा यह कार्यशाला आयोजित की गई थी।
सामाजिक कल्याण निदेशक श्रीमती किरण कुमारी पासी ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, सहिया, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और युवा संगठनों को नशा रोकथाम और परामर्श में मुख्य साझेदार बनाया जाएगा।
पंचायती राज, नगर विकास, गृह विभाग (नारकोटिक्स प्रकोष्ठ), उच्च शिक्षा और जेएसएलपीएस के प्रतिनिधियों ने मिलकर रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर चर्चा की।बैठक में नशा मुक्त हेल्पलाइन 14446 तथा उपलब्ध परामर्श सेवाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर जोर दिया गया।
अंत में झारखंड में नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की गई, जिसे केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को भेजा जाएगा।
