​रांची। झारखंड में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत फर्जी और संदिग्ध दस्तावेजों के जरिए वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने की साजिश का खुलासा हुआ है। 30 सितंबर तक चलने वाली इस प्रक्रिया में स्थानीय निवासियों के साथ-साथ अन्य राज्यों के नागरिक भी आवेदन कर रहे हैं। हालांकि, फर्जी कागजातों की शिकायतें मिलने के बाद निर्वाचन आयोग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है।

मतदाता सूची में गड़बड़ी रोकने के लिए राज्य के बाहर से जारी हुए लगभग 20 हजार दस्तावेजों को सत्यापन के लिए संबंधित राज्यों को भेजा गया है।

​सबसे ज्यादा मामले बिहार और उत्तर प्रदेश से जुड़े दस्तावेजों की संख्या सर्वाधिक है। इसके अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल और असम भी दस्तावेज भेजे गए हैं।

​24 सितंबर तक केवल बिहार में 1,300 से अधिक मामले लंबित थे। फिलहाल सभी राज्यों को मिलाकर लगभग 3,000 दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होना बाकी है। 30 सितंबर तक दावे-आपत्तियां स्वीकार किए जाने के कारण यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

​प्रयाग महिला विद्यापीठ समेत कई संस्थानों के सर्टिफिकेट पर संशय

जांच के दौरान कई शैक्षणिक संस्थानों के प्रमाण पत्र अवैध या फर्जी पाए गए हैं। प्रयागराज स्थित 'प्रयाग महिला विद्यापीठ' से जारी कुछ सर्टिफिकेट की मान्यता पर सवाल उठने के बाद उन्हें अवैध घोषित किया गया है। इसके अलावा अन्य बोर्ड्स के कागजातों पर भी आशंका जताई गई है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार के अनुसार गड़बड़ी रोकने के लिए बहुस्तरीय जांच प्रक्रिया अपनाई जा रही है।सीबीएसई और आईसीएसई के प्रमाण पत्रों का वेरिफिकेशन सीधे संबंधित बोर्ड से कराया जा रहा है। दूसरे राज्यों के कागजात वहां के सीईओ के माध्यम से जांचे जा रहे हैं।जिला निर्वाचन पदाधिकारी को ECINET पर प्राप्त दस्तावेजों का सत्यापन 5 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य है।

नाम दोहराव, पता बदलने या कागजात अधूरे होने पर संबंधित आवेदकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ई आर ओ द्वारा मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेज बीएलओ ऐप के माध्यम से अपलोड किए जाएंगे।​निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच में फर्जी या अवैध पाए जाने वाले दस्तावेजों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।