रांची। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने झारखंड में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के विरोध में कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन पर कड़ा प्रहार किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कांग्रेस के इस रुख को "राजनीतिक अवसरवाद का उत्कृष्ट उदाहरण" करार देते हुए कहा कि पार्टी को सड़क पर नौटंकी करने के बजाय तथ्यों और आंकड़ों के साथ सामने आना चाहिए।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि झारखंड कांग्रेस का आंदोलन विरोधाभासों से भरा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया को लागू करने की मुख्य जिम्मेदारी बीएलओ, बीडीओ, सीओ, एसडीएम और डीसी जैसे प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की है, जो राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के ही प्रशासनिक तंत्र के तहत काम कर रहे हैं।
इसके अलावा, सत्ताधारी दल के रूप में कांग्रेस और झामुमो के कार्यकर्ता भी बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के रूप में इस पूरी प्रक्रिया में सहभागी हैं। ऐसे में एसआईआर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाकर कांग्रेस एक तरह से अपनी ही सरकार और अपने ही कार्यकर्ताओं की निष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
कांग्रेस के दावों को खारिज करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने पार्टी से सीधे सवाल पूछे हैं कि कांग्रेस सार्वजनिक करे कि राज्य भर में उसके कितने कार्यकर्ता बीएलए के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं?
अजय साह ने कहा कि सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के बावजूद कांग्रेस आज तक उन लोगों का ठोस आंकड़ा पेश नहीं कर पाई है, जिनके नाम काटे जाने का वह दावा कर रही है। यदि कांग्रेस के दावों में सत्यता है, तो उसे प्रमाणों के साथ सामने आना चाहिए।
कांग्रेस का पलटवार: 'एसआईआर' पर सवालों के जवाब देने के बजाय जवाबदेही से भाग रही भाजपा
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर)को लेकर कांग्रेस के आंदोलन पर भाजपा की बयानबाजी का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा अब लोकतांत्रिक सवालों के जवाब देने के बजाय सवाल उठाने वालों को बदनाम करने का काम कर रही है।
राकेश सिन्हा ने कहा कि जब कांग्रेस मतदाता सूची की पारदर्शिता, पात्र मतदाताओं के अधिकार और वोटर लिस्ट में सुधार पर सवाल उठाती है, तो भाजपा जवाब देने के बजाय बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) की संख्या पूछकर मूल मुद्दे को भटकाने की कोशिश करती है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया सरकारी अधिकारियों द्वारा संचालित होने का मतलब यह नहीं कि वह त्रुटिहीन है। किसी पात्र मतदाता का नाम न छूटे और गलत तरीके से नाम न हटे, इसके लिए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय होनी चाहिए।
श्री सिन्हा ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी या बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे पुराने मुद्दों को उछालकर भाजपा वर्तमान 'एसआईआर' प्रक्रिया में पारदर्शिता और जनहित के सवालों से बचना चाहती है।
कांग्रेस ने मांग की है कि भाजपा शिकायतों के निष्पक्ष निपटारे और मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने का समर्थन करे।
