जमशेदपुर। औद्योगिक शहर जमशेदपुर में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और बिगड़ी यातायात व्यवस्था को लेकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। बुधवार को बर्मामाइंस थाना पहुंचकर उन्होंने पुलिस अधिकारियों से क्षेत्र की ट्रैफिक व्यवस्था और हालिया सड़क हादसों की जानकारी ली। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने हादसों की रोकथाम, नो-एंट्री के कड़े पालन और पीड़ित परिवारों को राहत देने के मुद्दे पर जिला प्रशासन और टाटा कंपनी प्रबंधन पर सवाल खड़े किए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मंगलवार रात करीब 10:30 बजे सुनसुनिया गेट के पास हुए दर्दनाक हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि एक ट्रक ने बाइक सवार युवक को लगभग 40 मीटर तक घसीटा, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि सुनसुनिया गेट टाटा कंपनी से जुड़ा क्षेत्र है, इसलिए टाटा कंपनी को मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
चंपई सोरेन ने भारी वाहनों के अवैध परिचालन पर सवाल उठाते हुए कहा:
शहर में नो-एंट्री हटने का समय रात 11 बजे तय है, तो 10 से 10:30 बजे के बीच भारी वाहन शहर के भीतर कैसे आ रहे हैं? समय से पहले आने वाले ट्रकों को शहर के बाहर ही रोका जाना चाहिए।
टाटा नील्को, सीमेंट कंपनी और पावर प्लांट जैसी इकाइयों के कारण शहर में सैकड़ों ट्रक-ट्रेलर का आना-जाना होता है। ऐसे में भारी वाहनों के परिचालन की निगरानी सख्त होनी चाहिए।
उन्होंने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से शहर की यातायात व्यवस्था की नियमित और गंभीर समीक्षा करने की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जमशेदपुर एक बड़ा औद्योगिक केंद्र है, जहां लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सड़क हादसों पर अंकुश लगाने और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए टाटा कंपनी और जिला प्रशासन मिलकर संयुक्त रूप से ठोस कदम उठाएं।
