रांची: झारखंड भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षा मामले में सामने आए नए तथ्यों को लेकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर विरोधाभासी एफिडेविट दाखिल कर अदालत को गुमराह करने का प्रयास किया है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि सीजीएल परीक्षा में सरकार की भूमिका अब खुद सवालों के घेरे में है। एक तरफ सीआईडी की शुरुआती जांच के आधार पर परीक्षा को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी गई थी, वहीं अब उसी मामले में सफल अभ्यर्थियों समेत कई लोगों की गिरफ्तारियां हो रही हैं और पेपर लीक नेटवर्क का भंडाफोड़ हो रहा है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि लगभग डेढ़ साल पहले सीआईडी की पहली जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने दावा किया था कि कोई प्रश्न पत्र लीक नहीं हुआ है। उस समय सीआईडी का यह हास्यास्पद तर्क था कि 125 में से 115 प्रश्नों के लीक होने का मामला केवल 'गेस पेपर' का मिलना था।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पहली जांच सही थी, तो आज ये गिरफ्तारियां और नए सबूत कहां से आ रहे हैं? और अगर वर्तमान जांच सही दिशा में है, तो फिर पहली जांच में किस आधार पर क्लीन चिट दी गई थी?
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि बाद में सीआईडी ने खुद दूसरी जांच रिपोर्ट में परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए और खुलासा किया कि लाखों रुपये में सीटों का सौदा हुआ था। इसी दूसरी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में दूसरा विरोधाभासी शपथ पत्र दाखिल कर माना कि 'परीक्षा की पवित्रता नष्ट हुई है'। एक ही मामले में अदालत के समक्ष दो अलग-अलग स्टैंड लेना एक गंभीर विषय है।
प्रतुल शाहदेव ने राज्य सरकार से सीधा सवाल करते हुए कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि सीआईडी के जिन अधिकारियों ने पहली जांच में मामले को दबाया और सरकार
