रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने बिना पासपोर्ट और वैध दस्तावेजों के भारत में प्रवेश करने के मामले में दोषी बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद नजमुल हवालदार की आपराधिक अपील खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी ने खुद अपना अपराध स्वीकार किया था, इसलिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों के तहत उसकी अपील सुनवाई योग्य नहीं है।
नजमुल को 24 फरवरी 2023 को साहिबगंज के तालझारी रेलवे स्टेशन के पास पकड़ा गया था। ट्रायल कोर्ट ने 19 जून 2024 को उसे विदेशी अधिनियम की धारा 14A(b) के तहत दो साल की सजा और 10,000 रुपये का जुर्माना सुनाया था।
अदालत ने दोषी नागरिकों को निर्वासित करने में केंद्र सरकार, झारखंड और पश्चिम बंगाल सरकार के स्तर पर हुई देरी पर कड़ी नाराजगी जताई।
नजमुल और दो अन्य बांग्लादेशी महिलाएं (रिना खान और निपाह अख्तर) 9 जून 2025 को हजारीबाग के होल्डिंग कैंप से फरार हो गए थे, जिन्हें बाद में दोबारा पकड़ा गया।हाईकोर्ट ने तीनों बांग्लादेशी नागरिकों के निर्वासन की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है। साथ ही, साहिबगंज एसपी को नजमुल को भारत लाने और मदद करने वाले राहुल और मोहम्मद सागर की भूमिका की जांच करने को कहा है।
अदालत ने झारखंड व पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी तथा केंद्र के गृह व विदेश मंत्रालय को आदेश की प्रति भेजते हुए 25 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
